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पर्यटन
देखें, मनाली की कोठी गांव में बर्फबारी का नजारा

ताजा बर्फबारी के बाद मनाली के कोठी गांव के खूबसूरत नजारे 

जानिए पर्यटन, मनोरंजन पार्क और फिल्म सिटी के लिए क्या योजना है मुख्यमंत्री की

राज्य सरकार प्रदेश में पर्यटन के सतत विकास व मौजूदा पारिस्थितिकी और पर्यावरण को बनाए रखते हुए पर्यटन क्षेत्र में अधोसंरचना के विकास के लिए निजी क्षेत्र को बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज चण्डीगढ़ में यह आज भारतीय पर्यटन कार्यशाला के समापन सत्र में बोलते हुए कहा। सम्मेलन का आयोजन सैंटर फॉर इकॉनोमिक पॉलिसी रिसर्च चण्डीगढ़ द्वारा एचपीटीडीसी, हरियाणा टूरिजम, उत्तर प्रदेश टूरिजम, पंजाब टूरिजम और उत्तराखण्ड टूरिजम के सहयोग से किया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ इसमें रोजगार व स्वरोजगार की भी अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि गोवा देश में एक ऐसा राज्य है, जिसकी आर्थिकी पर्यटन पर निर्भर है तथा पर्यटन के क्षेत्र में अपार प्रगति की है। उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों को भी इससे सीख लेते हुए अपनी आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए पर्यटन को एक बड़ा साधन बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में आने वाले पर्यटकों के लिए यहां का शांत वातावरण एक प्रमुख आकर्षण है। उन्होंने कहा कि राज्य को अपने स्वच्छ तथा प्रदूषणमुक्त वातावरण को बढ़ावा दे रहा है तथा राज्य के 67 प्रतिशत भाग पर वन आवरण है।

ट्रायल सफल, अब इस दिन से कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर दौड़ेगी विस्टा डोम कोच, जानिए क्या है खासियत

यूनेस्को की विश्व धरोहर में शुमार कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर सफर करने वाले सैलानियों को जल्द ही शीशे की छत से प्राकृतिक नजारे नजर आएंगे। देश-विदेश के पर्यटकों को अगले सप्ताह तक विस्टा डोम कोच निहार की सुविधा मिलने वाली है। इस पारदर्शी कोच में बैठकर पर्यटक कालका से शिमला 96 किमी लंबे इस ट्रैक पर आने वाली वादियों को चारों ओर से निहार सकेंगे। डोम कोच के साथ ट्रेन का ट्रायल रविवार को पूरा हो गया। शनिवार को भी कालका से शिमला तक का ट्रायल सफल रहा था। यह सुविधा सैलानियों के लिए एक खूबसूरत यादगार बनेगी।

हिमाचली व्यंजनों का स्वाद चखना है तो यहां आइए

हिमाचल में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निजी हाथों का हमेशा योगदान रहा है। खान पान से लेकर रहन सहन तक निजी क्षेत्र के लोगों ने पर्यटकों को हिमाचल की सुरमयी वादियों तक पहुंचाने में खूब मेहनत की और नए प्रयोग किए हैं। इसी उद्देश्य से सोलन के आंजी में हिमाचल के पारम्परिक व्यंजनों से लबरेज रेस्तरां एवं होमस्टे शुरू किया है। 

यहां बारिश होना किसी अजूबे से कम नही

हिमाचल की लाहुल स्पीती के किब्बर की धरती पर बारिश का होना किसी अजूबे से कम नही होता। बादल यहां आते तो हैं लेकिन शायद इन्हें बरसना नहीं आता और ये अपनी झलक दिखाकर लौट जाते हैं। एक तरह से बादलों को सैलानियों का खिताब दिया जा सकता है जो घूमते, टहलते इधर घाटियों में निकल आते हैं और कुछ देर विश्राम कर पर्वतों के दूसरी ओर रुख कर लेते हैं। यही वजह है कि किब्बर में बारिश हुए महीनों बीत जाते हैं। यहां के बाशिंदे सिर्फ बर्फ से साक्षात्कार करते हैं और बर्फ भी इतनी कि कई-कई फुट मोटी तहें जम जाती हैं। जब बर्फ पड़ती है तो किब्बर अपनी ही दुनिया में कैद होकर रह जाता है और गर्मियों में धूप निकलने पर बर्फ पिघलती है तो किब्बर गांव सैलानियों की चहलकदमी का केंद्र बन जाता है।

दीवाली में पर्यटकों को यह ऑफर दे रहा है हिमाचल पर्यटन निगम

हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम दिवाली पर्व के अवसर पर एक विशेष पैकेज दे रहा है। एचपीटीडीसी के किसी भी होटल में दो रातों के लिए ठहरने वाले अतिथियों को तीसरी रात का ठहराव मु त दिया जाएगा। इसी प्रकार निगम के किसी भी होटल में 3 रातों तक ठहरने वाले अतिथियों को निगम के किसी भी होटल में दो रातों का ठहराव मु त दिया जाएगा। 

उपेक्षा का शिकार बंजार

कुल्लू जिला की बंजार घाटी बेशक कुदरत ने अपने हाथों से सजाई है लेकिन पर्यटन के लिहाज से यह घाटी अभी भी उपेक्षित और ठुकराई हुई सी प्रतीत होती है l घाटी के ग्रेट हिमालयन  नेशनल पार्क को यूनिस्को की विश्वधरोहर बनाने के प्रयास आखिरी चरण में होने से घाटी का महत्व और भी बढ़ जाता हैl घाटी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के राजनेताओं ने वादे तो बहुत किए लेकिन सिरे किसी ने भी नहीं चढ़ायाl

480 करोड़ से संवरेंगे हिमाचल के ये नए पर्यटन स्थल

एशियन विकास बैंक के तहत राज्य में अनछुए तथा नए पर्यटन गंतव्यों में अधोसंरचना के विकास पर 480 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। एशियन विकास बैंक ने राज्य के लिए 1892.04 करोड़ रुपये की ट्रैंच-2 परियोजना स्वीकृत की है। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

कर्नल बैंटी के सपनों का गांव : बरोट

अंग्रेजी हुकुमत में कर्नल बैंटी की बरोट पर खास मेहर रही है. इसलिए इस बरोट को कर्नल बैंटी के सपनों का गांव भी कहा जाता है.