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खेत-खलिहान
कोरोना काल में बढ़ीऔषधीय पौधों व जड़ी-बूटियों की मांग

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के इस संकट भरे दौर में औषधीय पौधों व जड़ी बूटियों की मांग में एकाएक बढ़ौतरी देखने को मिल रही है। विभिन्न औषधीय पौधे व जड़ी बूटियां न केवल शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है बल्कि कई बीमारियों में राम बाण का काम भी करती हैं।

सावधान बागवान : इन जिलों में टिड्डियां कर सकती है हमला

कृषि निदेशक ने बताया कि सभी फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि वे टिड्डियों के हमले के प्रति किसानों में जागरूकता लाएं और उन्हें कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए प्रेरित करंे। उन्होंने कहा कि इसके बचाव के लिए 30 लीटर पानी में 200 ग्राम मैथेरिजियम और बाॅवरिया जैसे जैव कीटनाशक का घोल बना कर छिडकाव करना लंबे समय तक प्रभावी होगा। उन्होंने कहा कि जैव नियंत्रण प्रयोगशाला, कांगड़ा और मंडी को इन जैव कीटनाशकों को पर्याप्त मात्रा में तैयार करने के निर्देश दिए गए है।

लाॅकडाउन में पशुपालकों को दी सरकार ने ये बड़ी राहत

राज्य सरकार ने प्रदेश में लाॅकडाउन के दौरान पशुओं के लिए चारा और अन्य खाद्य सामग्री, चिकित्सा सुविधा इत्यादी उपलब्ध करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाकर पशु पालकों को बड़ी राहत पहुंचाई है। प्रदेश में कर्फ्यू लगाए जाने के बाद राज्य सरकार ने भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार पशु पालकों के हितों को सुरक्षित करने के लिए उन्हें आवश्यक सेवाओं में शामिल कर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने को प्राथमिकता दी है। पड़ोसी राज्यों से फीड और चारा आयात कर पशुपालकों को उपलब्ध करवाया है।

जनजातीय इलाकों की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगा ढींगरी मशरूम

लाहौल-स्पीति के लोगों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में ढींगरी मशरूम नए नगदी उत्पाद के तौर पर उभर कर सामने आया है। वानस्पतिक नाम ‘प्लुरोटस ओस्ट्रीटस’ के नाम से भी पहचाने जाने वाले इस ढींगरी मशरूम ने स्पीति घाटी के लोगों के लिए आय के नए द्वार भी खोले हैं।  नगदी उत्पाद के तौर पर अपनी जगह बना रहे इस ढींगरी मशरूम से स्पीति घाटी में नए अध्याय का सूत्रपात हुआ है। 

बागवानी महकमे ने शुरू किया ई-उद्यान पोर्टल, बागवानों को होंगे ये फायदे

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित हिमाचल प्रदेश बागवानी विकास परियोजना के तहत ई-उद्यान पोर्टल  तथा इसी पोर्टल का मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारम्भ किया।

ताकि लॉक डाउन में भी लहलहाती रहे आपकी बगिया

मंडी जिला प्रशासन ने कोरोना संकट में जिला के किसानों-बागवानों की कठिनाइयों के समाधान को पक्के प्रबंध किए हैं। उपायुक्त ऋग्वेद ठाकुर के निर्देशानुरूप जिला का बागवानी विभाग यह सुनिश्चित बना रहा है कि बागवानी गतिविधियों से जुड़े लोगों को अपने बगीचों की देखभाल को लेकर किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

कोरोना संकट में किसानों का सहारा बनेगी प्राकृतिक खेती

वैश्विक महामारी कोरोना ने स्वास्थ्य के अलावा लगभग सभी अन्य क्षेत्रों में भी कई नए संकट पैदा कर दिए हैं। कृषि क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रह पाया है। 

फूल उत्पादकों के लिए जी का जंजाल बना लॉकडाउन ( देखें Video)

कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में जहां लॉक डाउन चला हुआ है। हिमाचल प्रदेश का पोंटा साहब भी उससे अछूता नहीं है हर प्रकार के काश्तकारों के सामने अपनी अपनी मुसीबतें मुंह बाए खड़ी हैं। कुछ ऐसा ही हाल फूलों की खेती करने वाले काश्तकारों का भी है।

कुल्लू घाटी में फिर महकने लगी पारम्परिक भोजन की थाली

वैश्विक महामारी की रोकथाम के लिए चल रहे लॉकडाउन में कुल्लू के ग्रामीण इलाकों में परोसे जाने वाले पारंपरिक व्यजंन फिर महकने लगे हैं। उपरी क्षेत्र में लोग घरों में खेतीबाड़ी में मशगूल है और विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी परंपराओं का पुर्ननिर्वाह कर रहे हैं। गांव के रसोईघरों में अब गेंहु की मौडी बांटी जा रही है, कोदरे की रोटी और कुल्थ की दाल पक रही है। जिला के उपरी इलाकों में विशेष पकवान परोसने की परंपरा रही है। दालों की लाफी, पत्तियों का कड़ा और घी-बाड़ी सेहतमंद माने जाते हैं।

धनी राम को नर्सरी ने बनाया धनवान

कुल्लू के उपनगर भुंतर के समीप कलैहली गांव के धनी राम ने हर सीजन की तरह इस बार भी निजी भूमि पर एक बड़ी नर्सरी तैयार कर ली थी। नर्सरी में शिमला मिर्च, मिर्च, टमाटर, बैंगन, बंद गोभी व फूल गोभी के लाखों पौधे लगभग तैयार थे। इतने में प्रदेश सरकार ने लाॅक-डाउन की घोषणा कर दी। धनी राम को लाखों की तैयार की गई पनीरी को किसानों तक पहुंचाने की चिंता होना स्वाभाविक था। उन्हें लगा कि इस बार कोरोना का संकट उन पर भारी पड़ जाएगा और महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

लाॅकडाउन में ऐसे हो रही है किसानों की परेशानी दूर

वैश्विक महामारी कोरोना के संकट के कारण देश भर में लाॅकडाउन एवं कफ्र्यू लागू किया गया तो कुल्लू जिला के किसानों-बागवानों को यही चिंता सताने लगी थी कि कहीं इससे उनकी मेहनत पर पानी तो नहीं फिर जाएगा? उनके मन-मस्तिष्क में यही सवाल उठ रहा था कि आखिर खेतों में लगभग तैयार हो चुकी उनकी नकदी फसलों और बागीचों में फूलों से सज चुके फलदार पेड़ों की देखभाल कैसे होगी?

कृषि मंत्री ने हिमाचली किसानों के हितों के लिए कही ये बड़ी बातें

कृषि, जनजातीय विकास व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डाॅ. राम लाल मारकण्डा ने कहा कि प्रदेश की 80 प्रतिशत आबादी कृषि व बागवानी पर निर्भर है, इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि किसानों को हर संभव सुविधाएं प्रदान की जाएं। वह मंगलवार को परिधि गृह कुल्लू में पत्रकारों वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

फसल की कटाई पर रोक नहीं

उपायुक्त ऊना संदीप कुमार ने ऊना मे पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिला ऊना में कहीं भी फसल कटाई या खेतों में काम करने पर कोई रोक नहीं है। इसको लेकर वह व्यवस्थाओं के अनुरूप किसानों को काम करना होगा। कहीं-कहीं जगहों पर कुछ कठिनाइयां जरूर हैं जिनको हल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एफसीआई का जलग्रां गोदाम शुरू हो गया है और जिला के किसान वहां पर अपनी फसल बेच सकते हैं। इसके अलावा कांगड़ एफसीआई गोदाम को शुरू करने का भी प्रयास किया जा रहा है, यह मामला संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया गया है।

कृषि-बागवानी से जुड़ी सलाह के लिए करें संपर्क

आपको खेती-किसानी-बागवानी में कोई समस्या आ रही है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। मंडी जिला में कोरोना वायरस (कोविड 19) के चलते लागू कर्फ्यू के बीच किसानों-बागवानों के सहयोग के लिए जिला प्रशासन ने हैल्पलाईन नंबर साझा किए हैं, ताकि लोग घर बैठे ही खेती से जुड़ी अपनी समस्याओं का समाधान पा सकें।

किसान रथ ऐप डाउनलोड करें कृषक : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री डाॅ. राम लाल मारकंडा ने कहा कि देश में कोरोना महामारी के दृष्टिगत केंद्र सरकार द्वारा किसानों को अपना उत्पाद आसानी से मंडियों में भेजने के लिए किसान रथ नाम से एक मोबाइल एप्लिकेशन विकसित की गई है। उन्होंने कहा कि यह किसान रथ ऐप, किसान का अपना वाहन होगा और इससे किसानों और व्यापारियों को अपने कृषि उत्पादों की ढुलाई के लिए उचित वाहन सुविधा चिन्हित करने में सहायता मिलेगी।

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