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खेत-खलिहान
जानिए कृषि और बागवानी के लिए क्या है हिमाचल सरकार की योजनाएं

मण्डी मध्यस्थता योजना के तहत 21196 मी.टन फल की खरीद

जानिए 1134 करोड़ के बागवानी विकास प्रोजेक्ट की जांच में क्यों लग रही है ब्रेक

बागवानी के क्षेत्र में सबसे बड़ा विकास प्रोजेक्ट के तहत विदेशों से सेब के पौधे खरीद मामले की जांच पर ब्रेक लगती नजर आ रही है। हालांकि प्रदेश सरकार ने अगस्त महीने में विदेशी कंसल्टेंट को शिमला में तलब किया था। बागवानी विकास परियोजना में हुई अनियमित्ताओं की जांच में तेजी आ रही थी, लेकिन अब बागवानी मंत्री खुद कह रहे हैं कि जांच चलती रहेगी। उनका फोकस सिर्फ परियोजना में तेजी लाने का है।

फसलों में रोग की प्रतिछाया के मंथन को इस दिन नौणी विवि में जुटेगें देश भर से वैज्ञानिक

डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पादप रोग विज्ञान विभाग (प्लांट पैथोलॉजी) द्वारा नवम्बर 2 और 3 को विश्वविद्यालय परिसर में किसानों की आय बढ़ाने के लिए संयंत्र स्वास्थ्य प्रबंधन में वैकल्पिक दृष्टिकोण विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।

यहां जीरो बजट में पारंपरिक तरीके से होती है लाल चावल की खेती

हिमाचल की दुर्गम चौहार घाटी मे आज भी प्राकृतिक रूप से परंपरागत तरीके से लाल चावल उगाया जाता है। आज के युग में केमीकल खेती ने जहां खाद्य पदार्थों की गुणवता पर सवालिया चिन्ह लगा दिए हैं वहीं प्रदेश में आज भी कुछ दुर्गम क्षेत्रों में परंपरागत खाद्यों पदार्थों की खेती की जा रही है। इसी में शामिल है चौहार घाटी के चौहारटु चावल जो अपने लाल रंग व अपनी औषधीय गुणवत्ता के कारण विशेष महत्व रखते हैं। हरित क्रांति के दौर में अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों की ओर किसानों के रूझान से दूर चौहार घाटी के किसान आज भी लगभग एक हजार हैक्टेयर में लाल चावलों की चौहारटी किस्म उगा रहे हैं। पब्बर नदी के दोनों तटों पर उगाए जाने वाले चावलों की यह किस्म प्रदेश के अन्य चावलों से पूर्णतय भिन्न है।

हिमाचल में जीरो बजट खेती की और हकीकत

हम हिमाचल वासियों के लिये बहुत ही गर्व का विषय है आचार्य-कुल के सूर्य आचार्य देवव्रत जी को अपने बीच महामहिम राज्यपाल महोदय के रूप में पाकर? राज्यपाल अक्सर राजनीति के मंझे खिलाड़ी ही को नियुक्त किया जाता है जो पक्ष की सरकार को विपक्षी काम करने के लिये आंखें दिखाएं या विपक्ष को सही सोच आगे रखने के लिये भी आंखें दिखाएं। 

कर्नल बैंटी के सपनों का गांव : बरोट

अंग्रेजी हुकुमत में कर्नल बैंटी की बरोट पर खास मेहर रही है. इसलिए इस बरोट को कर्नल बैंटी के सपनों का गांव भी कहा जाता है.