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मेरा गांव
भौंरूथाच : ये सादगी...भोलापन और कहां

पहाड़ खुद खूबसूरती की मिसाल हैं. भोलापन, सादगी, कड़ी मेहनत, यह सब पहाड़ की जीवनशैली का हिस्सा है. पहाड़ों की तरह कठोर एवं जीवट यहां का जनजीवन है. प्रकृति ने पहाड़ों के आंचल में कई ऐसे खूबसूरत भू-खंड रचे हैं जहां की प्राकृतिक आभा किसी का मन न मोह लें यह हो नहीं सकता. देवभूमि कुल्लू की सैंज घाटी पार्वती परियोजना और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की बजह से आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है.

कर्नल बैंटी के सपनों का गांव : बरोट

अंग्रेजी हुकुमत में कर्नल बैंटी की बरोट पर खास मेहर रही है. इसलिए इस बरोट को कर्नल बैंटी के सपनों का गांव भी कहा जाता है.