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विचार
'मैन इन एक्शन'

चुनाव खत्म फिर भी यह शख्स एक्शन में हैं क्यों ? क्योंकि यह नेता नहीं हैं। पोंग बांध विस्थापितों का मामला हो या सीमेंट कंपनियों की लूट, इन्होंने सबसे सीधा पंगा ले रखा है।

तस्वीरें बोलती है : अनुराग के लिए हमीरपुर का प्रेम हुआ कम

राजनीति में औकात सत्ता के साथ कब बदल जाये कोई पता नहीं लगता। इसलिए किसी मुगलाते मे नहीं रहना चाहिए। तस्वीरों में देखिए। हमीरपुर के सांसद, पहली तस्वीर में (क्लोज अप ) बिना बुके लिए माननीय मुख्यमंत्री का स्वागत करने पहुंच गए, दूसरी तस्वीर ( पहली तस्वीर का फूल वर्शन) सभी मुख्यमंत्री के लिए बुके लेकर खड़े हैं। और तीसरी तस्वीर में माननीय मुख्यमंत्री और नादौन के हारे हुए विधायक को भाजपा कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से लाद रखा है और सांसद महोदय को किसी ने पूछा तक नहीं है।

अभिषेक राणा ही हमीरपुर से क्यों ?

आगामी लोकसभा चुनावों का बिगुल कभी भी बज सकता है और जिस तरह से केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार का ग्राफ लगातार गिर रहा है उससे कांग्रेस के नेता ज्यादा उत्साहित हैं और इसी बजह से टिकट के दावेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनमें सबसे बड़े नाम नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू का है। क्योंकि, दोनों ही बड़े नाम हैं और विधानसभा में विपरीत परिस्थितियों में चुनकर पहुंचे हैं। लेकिन, यह दोनों नेता अगली बार मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं इसलिए यह नहीं चाहेंगे कि खामखा पंगा लिया जाए। 

हिमाचली हकों पर डाका

हिमाचल में निर्माणाधीन और निर्मित परियोजनाएं जो बनकर तैयार भी हो चुकी हैं, अथवा जिनमें उत्पादन भी बरसों से प्रारंभ हो चुका है, वे चाहे केंद्रीय विद्युत उत्पादन निगम के अधीन थीं या फिर किसी गैर सरकारी कंपनी के अधीन बनीं अथवा स्वंय विद्युत विभाग ने अपने नाम से बनवाईं। इन परियोजनाओं के निर्माण कार्यों में हिमाचली लोगों को रोजगार नहीं मिल पाया है।

माटी की महक खो रहा कुल्लू दशहरा

अन्तर्राष्ट्रीय लोक-नृत्य उत्सव के रूप में विश्वविख्यात कुल्लू दशहरा अपनी माटी की महक खोने लगा है। धीरे धीरे इस लोकोत्सव का तिलिस्म टूटता जा रहा है। अब इस उत्सव में न तो पहले जैसे लोकनृत्य होते हैं, और न ही मिट्टी के दिए टिमटिमाते हैं। अब मिट्टी के दिये का स्थान झिलमिलाते बिजली के बल्बों ने लिया है और सांस्कृतिक कार्यक्रम लालचन्द प्रार्थी कलाकेन्द्र तक ही सिमटकर रह गए हैं।

हिमाचल में जीरो बजट खेती की और हकीकत

हम हिमाचल वासियों के लिये बहुत ही गर्व का विषय है आचार्य-कुल के सूर्य आचार्य देवव्रत जी को अपने बीच महामहिम राज्यपाल महोदय के रूप में पाकर? राज्यपाल अक्सर राजनीति के मंझे खिलाड़ी ही को नियुक्त किया जाता है जो पक्ष की सरकार को विपक्षी काम करने के लिये आंखें दिखाएं या विपक्ष को सही सोच आगे रखने के लिये भी आंखें दिखाएं।