हिंदी ENGLISH ਪੰਜਾਬੀ Monday, November 19, 2018
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हमारे देवालय
न्याय का अनूठा दरबार : न वकील... न दलील... सिर्फ एक कील

देव भूमि में देवताओ के प्रति अटूट आस्था रखने वाले लोगो की कमी नहीं हैं. इसका जीता-जागता प्रमाण पेश करते है, कुल्लू और मंडी जिला के सैंकड़ो देवस्थल. पहाड़ों में देव-आस्था शुरू से ही बलबती रही है. युग बदल गए परिवेश बदल गया लेकिन यदि कुछ नहीं बदला तो वो है देव आस्थाएं. न्याय की बात हो या दिल की मुराद, यहां हर मन्नत देवताओं के द्वार में पूरी होती है.

यहां सिक्का टिका तो, मन्नत पूरी

लाहुल को स्पीति से जोडऩे वाले कुंजुंम दर्रे में स्थित माता कुंजुम के दरबार में एक अजब तरीके से मन्नत पूरी होती है। मंदिर में रखी मूर्ति में सिक्का टीका तो मन्नत जरुर पूरी होगी। यहां से गुजरने वाला हर श्रद्धालु मन्नत मांगने माता के दर में जरुर दस्तक देता है। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत जरुरी पूरी होती है और सच्चे मन से मूर्ति पर सिक्का छूते ही चिपक जाता है। जो भी लोग यहां कुंजुंम दर्रे को पार करते हैं वे माता कुंजुंम के दरबार में जरुर हाजरी लगाते है साथ ही माथा टेक कर सुख समृद्धि का आशीर्वाद लेकर ही आगे बढ़ता है।

जन्म से राक्षसी स्वभाव से देवी हिडिम्बा के इस मन्दिर की क्या है खासियत, जानिए आप भी

देवभूमि के नाम से विख्यात कुल्लू जि़ला में वैसे तो लगभग हर गांव में किसी देवी या देवता के भव्य मंदिर हैं जो रहस्य और रोमांच से परिपूर्ण, मन्दिर यहां की प्राचीनतम सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करते हैं. उन्हीं देव सांस्कृतिक स्थलों में देवी हिडि़म्बा का मंदिर सबसे प्रमुख है. मनाली कस्बे की सुंदरता अपने आप में अदभुत है. चारों और देवदार के घने वृक्षों से घिरा यह मन्दिर ढुंगरी नामक स्थान पर स्थित है.