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जरा हट के
एक संयोग ऐसा भी : 71 दिन बाद दुल्हन लेकर अपने घर की दहलीज तक पहुंची बारात

कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ है। लॉकडाउन के बीच देश के कई हिस्सों से इसके उल्लंघन की की खबरें आती रहती हैं। लॉकडाउन में आम लोगों के बीच में से कुछ ऐसे मामले निकल के सामने आते हैं जो लोगों की जुबान पर चर्चा का विषय बन जाते हैं। ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जब शादी और अन्य कार्यक्रम होने के साथ-साथ लॉकडाउन का पालन भी किया जा रहा है। हिमाचल में भी एक ऐसी ही अजब गजब शादी पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है।

14 दिन बाद क्वारंटीन सेंटर से निकलूंगा, तो मास्क लगाना नहीं भूलूंगा

हरोली उपमंडल के तहत पंडोगा के पास डीसी ऊना ने बिना मास्क व बिना हेलमेट पहने दो युवकों को रुकने का इशारा किया, तो दोनों सड़क पर ही बाइक पर छोड़कर खेत की तरफ भाग निकले। बाद में पुलिस ने उन्हें ढूंढ निकाला और उपायुक्त ऊना संदीप कुमार के कार्यालय में लाया गया और दोनों को 14 दिन के लिए नंगड़ा में क्वारंटीन सेंटर में भेजने के निर्देश दिए।

'इस प्यार को क्या नाम दूं'

दोस्ती और प्यार एक सलोना और सुहाना अहसास है, जो संसार के हर रिश्ते से अलग है। तमाम रिश्तों के जंजाल में यह मीठा रिश्ता एक ऐसा सत्य है जिसकी व्याख्या होना अभी भी बाकी है। व्याख्या का आकार बड़ा होता हो सकता है लेकिन गहराई के मामले में वह अनुभूति की बराबरी नहीं कर सकती। इसीलिए दोस्ती और प्यार की कोई एक परिभाषा आजतक नहीं बन सकी। पूरी उम्र इंसान को एक अच्छे दोस्त की तलाश रहती है। इसी तलाश में यह पता चलता है कि दोस्ती का एक रंग नहीं होता बल्कि अलग-अलग रंगों से सजी दोस्ती कदम-कदम पर अपना रूप दिखाती है।

आज भी कौतूहल का विषय है ग्यू की ममी

हिमाचल की स्पीति घाटी जहां बौद्ध मठों व रेत की दृश्यावलियों के कारण विश्व विख्यात है, वहीं यहां ऐसा बहुत कुछ है, जो हैरान करने वाला है। यहां के एक गांव में एक लामा की ममी का अस्थि पिंजर बैठी हुई मुद्रा में अभी तक सलामत है। अभी भी उसके सिर पर बाल हैं। 

शिमला के जंगल में भालू वाला पेड़

कहा जाता है कि सैंकड़ों वर्षों पूर्व ये आदमख़ोर भालू किसी व्यक्ति के पीछे दौड़ रहा था. तो उस व्यक्ति ने पथरी माता (पुराना जुन्गा में स्थित पथरी माता मंदिर) से प्राथना की,  हे माता! इस भालू से मेरे प्राणों की रक्षा कीजिये. ये कहते हुए व्यक्ति एक देवदार के वृक्ष पर चढ़ने लगा. भालू भी व्यक्ति के पीछे पेड़ पर चढ़ने लगा और जैसे ही पेड़ के मध्य में पहुँचा तो पूरा भालू लकड़ी का बन गया. (जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है) सदियों से जीवित ये पेड़ और उस पर चिपका लकड़ी का भालू आज भी सदियों पुरानी हक़ीक़त बयान करता है.