हिंदी ENGLISH ਪੰਜਾਬੀ Monday, November 19, 2018
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व्यंग्य
कलम घिसाड़ - बिजी हूं, बिजी ही रहूंगा

कलम घिसारी का क्या है, जिधर ठीक लगा चल दिए उसी तरफ पोटली बांधकर. गंगा गए तो गंगादास और जमना गए तो जमनादास. बस कलम ही तो घिसनी है. 

कीटाणु का दर्दनाक बयान

भई कलम घिसारी तो आजकल बड़ाभारी डरा हुआ है. उसको पता चला है कि जान लेणे वाड़ी कोई बीमारी फैली हुई है. इसका नाम भी नया है. कोई एच 1 एन 1 नाम का वायरस लोगों की जान ले रहा है. तभी तो 'राज की धानी' को छोड़कर खिसक लिया है कलम घिसारी अज्ञातवास पर. 

काश ! डाक्टर को एक फोन कर पाता

घुमंतू पिछले कुछ दिनो से परेशान था और उसने क्षेत्रीय अस्पताल में जाने के बारे मं सोचा और सुबह ही घर से निकल पड़ा. अस्पताल पहुंचते ही घुमंतु ने अपने लिए पर्ची बनवाई और पर्ची जमा करने डाक्टर के कमरे के बाहर पहुंच गया, लेकिन वहां का दृश्य कुछ और ही था. डाक्टर के कमरे के बाहर काफी भीड़ थी और कुछ लोग अस्पताल के कर्मचारियों से डाक्टर को जल्दी बुलाने का आग्रह कर रहे थे, उनके एक साथी की हालत काफी गंभीर थी और डाक्टर साहब........... वे राउंड पर थे.