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लाहुल-स्पीति
लामा का सपना सच : अब साल भर जांस्कर से जुड़ी रहेगी पद्म घाटी

बीआरओ ने एक लामा के सपने को साकार कर दिया है। जिस दारचा-पद्म सड़क बनाने का बीड़ा उठाया था उसका पहला चरण पूरा हो गुआ है। इस सड़क के बनने से पद्म घाटी साल भर जांस्कर से जुड़ी रहेगी। 

मयाड़ घाटी की सड़कों पर सड़ रही है आलू की एक हजार बोरियां

र्फबारी के बाद जनजातीय जिला लाहुल स्पीती की मयाड़ घाटी के छालिग गांव में अभी भी एक हज़ार आलू की बोरियां सडकों पर पड़ी हुई हैं। अगर समय रहते इन्हें बाजार में नहीं पहुंचाया गया तो ये आलू पूरी तरह से सड़ जाएगा और किसानों को लाखों का नुक्सान होने का अंदेशा है।

बर्फवारी के बाद रोहतांग बंद, अब इस दिन खुलेगा यह दर्रा

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति समेत किन्नौर, कुल्लू व मनाली की उंची चोटियों पर बीते 24 घंटों से रुक-रुक कर हिमपात हो रहा है। लाहौल स्पिति का प्रदेश द्वार रोहतांग दर्रा लगातार बर्फबारी के कारण अगले पांच माह के लिए यातायात के लिए बंद हो गया है। 

जनजातीय आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे लाहुल के आलू उत्पादक

कृषि मंत्रालय भारत सरकार द्वारा निमोटोड वायरस होने की अधिसूचना जारी करने के एक महीने बाद अपनी ही अधिसूचना को रद्द करते हुए लाहुली आलू को वायरस मुक्त बताया। बीज आलू में वायरस की अफहवाह से लाहुली किसानों को भारी नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार की गलती से लाहुली किसानों के 9 करोड़ 21 लाख के आलू मनाली में फंसे है।

सरकार ने जब नज़रंदाज़ किया तो माईनस तापमान में सड़कों पर उतरे लाहुली

कड़ाके की ठंड का दंश झेल रहे लाहुलियों को आज सरकार की वादाखिलाफी के कारण सडकों पर उतरना पड़ा। यह पहला मौका है जब लाहुल घाटी के लोगों को नबंवर महीने की सर्द हवाओं के प्रदर्शन करना पड़ा। लाहुल घाटी किसान मंच के बैनर तले इस जन चेतना रैली में घाटी के हर क्षेत्र के किसानों व बागवानों ने शिरकत की। सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी करके इस शीत मरुस्थल में गर्माहट पैदा कर दी। 

मौसम बिगड़ने वाला है, लाहौल-स्पीति के लिए भेजी यह सामग्री

राज्य सरकार ने आगामी लगभग पांच महीनों तक भारी हिमपात के कारण शेष विश्व से कटे रहने वाले जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के लोगों के लिए सभी प्रकार की आवश्यक सामग्री की आपूर्ति कर दी है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जून, 2019 तक पर्याप्त राशन, रसोई गैस, पैट्रोल, मिट्टी तेल, लकड़ी तथा अन्य आवश्यक सामग्री लाहौल-स्पिति को भेजी जा चुकी है ताकि सर्दियों में घाटी के लोगों को राशन व अन्य आवश्यक सामग्री की कमी न हो।

लाहुल इन पंचायतों को सर्दियों में मिलेगा सस्ता राशन

हाल ही में हुई बर्फबारी को देखते हुए सरकार ने इस जिले के लोगों को बीपीएल रेट पर राशन देने का भी निर्णय लिया है। हालांकि यह राशन लाहौल की 28 और स्पीति की 6 पंचायतों को दिए जाने हैं, लेकिन अब सरकार ने सिर्फ लाहौल की 28 पंचायतों को ही देने का निर्णय लिया है। स्पीति के लिए सरकार सिर्फ पशु चारा के लिए 100 फीसदी ट्रांसपोर्ट सब्सीडी देगी। बताया गया कि सितंबर महीने में हुई बर्फबारी के दौरान जिले में 97 करोड़ का नुकसान हुआ था। जिसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी है और राहत राशि जारी करने की भी मांग की है।

अब की बार रोहतांग टनल से जाएगा लाहुल के पशुओं को चारा

इस बार मौसम के मिजाज को देखते हुए प्रदेश सरकार जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के लिए राहत देने जो रही है। बर्फबारी और उसके बाद यहां की स्थिति को देखते हुए इस बार रोहतांग टनल से पशु चारा लाहौल-स्पीति पहुंचेगा। हालांकि अभी रोहतांग टनल तैयार होने में एक साल से अधिक का समय लग सकता है, लेकिन प्रदेश की जयराम सरकार ने पशु चारा की सप्लाई टनल से करने का निर्णय लिया है। इस मसले पर प्रदेश सरकार ने केंद्र से अनुमति मांगी है। सोमवार को मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान जनजातीय विकास मंत्री डा. रामलाल मारकंडा ने कहा कि घाटी के लिए इस बार पशु चारा रोहतांग टनल से जाएगा।

यहां सिक्का टिका तो, मन्नत पूरी

लाहुल को स्पीति से जोडऩे वाले कुंजुंम दर्रे में स्थित माता कुंजुम के दरबार में एक अजब तरीके से मन्नत पूरी होती है। मंदिर में रखी मूर्ति में सिक्का टीका तो मन्नत जरुर पूरी होगी। यहां से गुजरने वाला हर श्रद्धालु मन्नत मांगने माता के दर में जरुर दस्तक देता है। श्रद्धालुओं में मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत जरुरी पूरी होती है और सच्चे मन से मूर्ति पर सिक्का छूते ही चिपक जाता है। जो भी लोग यहां कुंजुंम दर्रे को पार करते हैं वे माता कुंजुंम के दरबार में जरुर हाजरी लगाते है साथ ही माथा टेक कर सुख समृद्धि का आशीर्वाद लेकर ही आगे बढ़ता है।

यहां बारिश होना किसी अजूबे से कम नही

हिमाचल की लाहुल स्पीती के किब्बर की धरती पर बारिश का होना किसी अजूबे से कम नही होता। बादल यहां आते तो हैं लेकिन शायद इन्हें बरसना नहीं आता और ये अपनी झलक दिखाकर लौट जाते हैं। एक तरह से बादलों को सैलानियों का खिताब दिया जा सकता है जो घूमते, टहलते इधर घाटियों में निकल आते हैं और कुछ देर विश्राम कर पर्वतों के दूसरी ओर रुख कर लेते हैं। यही वजह है कि किब्बर में बारिश हुए महीनों बीत जाते हैं। यहां के बाशिंदे सिर्फ बर्फ से साक्षात्कार करते हैं और बर्फ भी इतनी कि कई-कई फुट मोटी तहें जम जाती हैं। जब बर्फ पड़ती है तो किब्बर अपनी ही दुनिया में कैद होकर रह जाता है और गर्मियों में धूप निकलने पर बर्फ पिघलती है तो किब्बर गांव सैलानियों की चहलकदमी का केंद्र बन जाता है।

आज भी कौतूहल का विषय है ग्यू की ममी

हिमाचल की स्पीति घाटी जहां बौद्ध मठों व रेत की दृश्यावलियों के कारण विश्व विख्यात है, वहीं यहां ऐसा बहुत कुछ है, जो हैरान करने वाला है। यहां के एक गांव में एक लामा की ममी का अस्थि पिंजर बैठी हुई मुद्रा में अभी तक सलामत है। अभी भी उसके सिर पर बाल हैं।