हिंदी ENGLISH ਪੰਜਾਬੀ Sunday, January 20, 2019
Follow us on
राज्य

बढ़ता जल प्रदूषण तथा भूजल के स्तर में गिरावट गंभीर समस्या

हिमाचल न्यूज़ | December 10, 2018 07:13 PM
मोहाली (पंजाब) : हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि बढ़ता जल प्रदूषण तथा भूजल के स्तर में गिरावट आज सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभरी है। स्वाभाविक रूप से विकसित जल वृद्धि प्रणाली को समझना और इसके अनुरूप कार्य योजना विकसित करना वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा और यदि इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई तो इसके दुष्परिणाम हमारे सामने होंगे।
 
राज्यपाल आज पंजाब में मोहाली स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना के तत्वावधान में भारत सरकार के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय के अंतर्गत भाखड़ा ब्यास प्रबन्धन बोर्ड द्वारा आयोजित ‘सतत जल प्रबंधन’ पर प्रथम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
 
आचार्य देवव्रत ने कहा भूजल के अत्यधिक शोषण और कुप्रबंधन के कारण भूजल स्तर विशेषकर पंजाब और हरियाणा राज्यों में तेजी से कम हो रहा है तथा वैज्ञानिकों के आंकड़ें बताते हैं कि भूजल स्तर चार फुट प्रतिवर्ष की दर से नीचे जा रहा है जो चिन्ता का विषय है। राज्यपाल ने कहा कि सिंचाई के लिए जल के आवश्यकता के अधिक प्रयोग को प्राकृतिक खेती अपनाकर रोका जा सकता है। 
 
राज्यपाल ने कहा कि पानी की उपलब्धता सुरक्षित किए बिना सतत विकास हासिल नहीं किया जा सकता तथा जल की उपलब्धता मानव अस्तित्व और कल्याण के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जल सुरक्षा के द्वारा पर्यावरण सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी तथा जल कुप्रबन्धन के विपरीत प्रभावों को भी रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा कि यह वित्त योजना, कृषि, ऊर्जा, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सभी क्षेत्रों में जल प्रबन्धन को एकीकृत करने से भी संबंधित है। उन्होंने कहा कि जल उपलब्धता की दृष्टि से सुरक्षित दुनिया में गरीबी कम होगी तथा शिक्षा का स्तर बढ़ेगा तथा जीवन स्तर में वृद्धि होगी।   
 
उन्होंने सुझाव दिया कि हमें अपने भूजल संसाधनों को संरक्षित करना चाहिए तथा अपने शहरी स्थानों की रचना इस प्रकार से करनी होगी, जिससे की हमारी भूजल संसाधनां पर निर्भरता कम हो तथा हमें पानी के पुनर्चक्रण और वर्षा जल संग्रहण में अधिक निवेश करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि ‘हमें मिट्टी की संरचना में सुधार और मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ाने के लिए फसल आवर्तन तकनीकों का भी विकास करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि वर्षा जल संग्रहण कई उद्देश्यों की पूर्ति करता है। उन्होंने सिंचाई के लिए पानी का उपयोग भी शामिल है जोकि भारत में एक चिन्ता का विषय है क्योंकि भूमि, नदियों और झीलों के जल का बहुत अधिक प्रयोग फसलों की सिंचाई के लिए होता है। 
 
उन्होंने कहा कि कीटनाशकों का उपयोग, भूजल में रासायनिक रूप से प्रभावित और प्रदूषित पानी का रिसाव चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पंजाब के मालवा क्षेत्र में कैंसर और अन्य बीमारियों की बढ़ती घटनाएं पिछले दशक में उभर कर सामने आई है। 
 
उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड, जल संसाधन मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग, केन्द्रीय सिंचाई और ऊर्जा बोर्ड तथा विश्व बैंक को ‘सतत जल प्रबंधन’ जैसे गंभीर विषय पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का विषय वैश्विक जलवायु परिवर्तन के आज के दौर में बेहद प्रासंगिक है।
 
Have something to say? Post your comment
और राज्य खबरें
प्राकृतिक कृषि है किसानों के लिये लाभ का सौदा : आचार्य देवव्रत
बुद्धि व विवेक से अध्ययन को अपना लक्ष्य बनाएं विद्यार्थी : आचार्य देवव्रत
आचार्य देवव्रत ने गुजरात के राज्यपाल से मुलाकात की
हिमाचल और उत्तर प्रदेश के मध्य सुलभ होगा यात्री परिवहन : गोविंद सिंह ठाकुर
धर्म वही जिसे धारण करने से स्वयं भी सुखी और अन्य भी सुखी
राज्यपाल ने किया कृषि विश्विद्यालय हिसार का दौरा भारतीय संस्कृति में है गाय को मां का दर्जा : देवव्रत
करनाल में गुरुकुल के बारे में हिमाचल के राज्यपाल ने कही ये बातें
समाज की प्रगति के लिए लड़कियों को शिक्षा जरुरी : आचार्य
बीड़ बिलिंग में उड़ान भरते ही दुर्घटना का शिकार हुए दो पैराग्लाइडर