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रामायण के राम की हिमाचल के जयराम से मुलाक़ात, जानिए अरुण गोबिल की रामायण से अब तक की अनूठी कहानी

हिमाचल न्यूज़ | January 23, 2019 09:49 PM
हिमाचल के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के साथ शिमला में अरुण गोविल

हिमाचल न्यूज़
रामायण के राम अरुण गोविल ने हिमाचल के मुख्यमन्त्री जयराम ठाकुर से हिमाचल सचिवालय मे मुलाक़ात की। यह एक औपचारिक भेंट थी। अपने जीवन के छ: दशक पूरे कर चुके अरुण गोबिल का न सिर्फ चेहरा बदला बल्कि अपने जीवन के साठ वर्षों में उनके जीवन में भी कई बदलाव आए हैं। धारावाहिक रामायण के इस किरदार के बारे में लोग आज भी जानना चाहते हैं और देखना चाहते हैं। हम आपको रामायण के इस मशहूर किरदार के बारे में बताने जा रहे हैं लेकिन इससे पहले धारावाहिक रामायण से जुड़े कुछ शानदार पहलुओं पर एक नजर डालना जरूरी हो जाता है।

अस्सी के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक रामायण ने टेलीविजन की दुनिया में वो इतिहास रच दिया, जो शायद कई दशकों तक लोग भूल नहीं पाएंगे। 25 जनवरी, 1987 को दूरदर्शन पर पहली बार प्रसारित होने वाला सीरियल रामायण आज 32 साल के बाद भी लोगों को नहीं भूला है।
रामायण की कहानी हमेशा से ही निर्देशकों को लुभाती रही है। कई बार रामायण और महाभारत टीवी पर किसी न किसी रूप में हम देखते ही आए हैं, लेकिन आखिर ऐसा क्या है कि 32 साल पहले वाले रामायण और महाभारत के पात्र ही लोगों के जेहन में हैं। आज भी जब राम की छवि हमारे दिमाग में आती है, तो अरुण गोविल का ही चेहरा नजर आता है।

रामायण मे श्रीराम के किरदार में अरुण गोविल Photo : Third Party
 80 के दशक में जब रामायण शुरू हुआ, तो रविवार के दिन लोग सारे काम छोड़कर टीवी के सामने बैठ जाते थे। रामायण देखने के लिए सड़कें सूनी हो जाती थी। रामायण को अमर बना दिया राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल ने। उस दौर में अरुण गोविल को लोग भगवान राम ही समझ बैठते थे। मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम के किरदार को अरुण ने छोटे पर पर कुछ इस तरह निभाया कि घर-घर में लोग उन्हें श्री राम की तरह पूजने लगे। वो जहां जाते थे, उनके पैर छूने के लिए लोगों की लाइन लग जाती थी।

अरुण गोविल : एक फिल्म के दृश्य में Photo : Third Party
 अरुण गोविल का जन्म 12जनवरी 1958 को मेरठ में हुआ है। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा उत्तरप्रदेश से ही हुई। उन्ही दिनों यह नाटक में अभिनय करते थे। इनके पिता चाहते थे कि यह एक सरकारी नौकरीपेशा बने पर अरुण गोविल का सोचना विपरीत था। अरुण कुछ ऐसा करना चाहते थे जो यादगार बने, इसलिए सन् 1975 में यह मुम्बई चले गए और वहाँ खुद का व्यवसाय प्रारम्भ किया उस वक्त यह केवल 17 वर्ष के थे। बिज़नेस करने से पहले ही उन्हें ऐक्टिंग करने का ऑफर मिल गया 1977 में ताराचंद बडजात्या की फिल्म पहेली में। उसके बाद उन्होंने सावन को आने दो, सांच को आंच नहीं, इतनी सी बात, हिम्मतवाला, दिलवाला, हथकड़ी और लव कुश जैसी कई फिल्मों में काम किया। रामायण सीरियल करने से पहले अरुण ख़ुद को एक अच्छे ऐक्टर के रूप में साबित कर चुके थे।

जब रामानंद सागर ने रामायण में अरुण को श्री राम का रोल ऑफर किया, तब उन्हें इस किरदार को निभाने के लिए सिगरेट पीने की पुरानी आदत छोड़नी पड़ी थी। तीन सालों तक चले रामायण धारावाहिक के दौरान उन्हें अपनी इमेज का ख़ास ध्यान रखना पड़ता था। रामायण से पहले लोगों ने उन्हें विक्रम और बेताल धारावाहिक में राजा विक्रमादित्य के रोल में ख़ूब पसंद किया था।

अरुण गोविल : रामायण के बाद
रामायण के बाद अरुण गोविल ने लव कुश, कैसे कहूं, बुद्धा, अपराजिता, वो हुए न हमारे और प्यार की कश्ती में जैसे कई पॉपुलर टीवी सीरियल्स में काम किया। लेकिन अरुण गोविल को जो पहचान रामायण से मिली, वो किसी और से नहीं मिली। रामायण के बाद उन्हें ऐसे ही रोल्स के ऑफर आने लगे, जिसके बाद अरुण ने लगभग 10 सालों तक फिल्मों से दूरी बना ली और रामायण के लक्ष्मण यानी सुनील लाहिड़ी के साथ मिलकर अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की। अरुण आजकल मुंबई में प्रोडक्शन कंपनी चलाते हैं, जो दूरदर्शन के लिए सीरियल बनाता है।

अरुण गोविल : श्री राम के किरदार में और अब Photo : Third Party
 

रामायण सीरियल को बने हुए 32 साल हो चुके हैं, लेकिन अरुण को लोग आज भी श्री राम के नाम से ही ज़्यादा जानते हैं। 25 सालों बाद पिछले साल ही अरुण ने धरती की गोद में धारावाहिक से छोटे पर्दे पर दोबारा वापसी की।

अरुण कभी श्री राम की छवि से बाहर ही नहीं निकल पाए। जितने प्रसिद्ध वो इस रोल से हुए थे, उतना ही बड़ा खामियाज़ा भी उन्हें उठाना पड़ा। फिल्मों में रोमांस करते हुए या नेगेटिव रोल में दर्शक उन्हें नहीं देखना चाहते थे। गोविल ने फिल्मों में बोल्ड सीन्स किए, कुछ धारावाहिकों में नेगेटिव किरदार निभाया, लेकिन अफसोस वो राम की छवि से कभी बाहर नहीं निकल पाए।

भले ही ‘रामायण’ को लगभग तीन दशक हो गए हों, पर अरुण गोविल आज भी टीवी के राम के रूप में ही पहचाने जाते हैं।

प्रस्तुति : हिमाचल न्यूज़

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