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बजट : हिमाचल को आस, जयराम देंगे तोहफे खास

हिमाचल न्यूज़ | February 08, 2019 08:57 PM

हिमाचल न्यूज़
शिमला : हिमाचल प्रदेश के लोगों को बजट से खास उम्मीदें हैं। लोगों को उम्मीद है कि इस बार मुख्यमंत्री जय राम बजट में खास तोहफे दिए जाएंगे। सूबे के किसानों, बागबानों, बेरजगारों, कर्मचारियों, आशा वर्करों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आउटसोर्स कर्मचारियों, मनरेगा के मजदूरों और श्रमिकों को कल यानि शनिवार नौ फरवरी को पेश होने वाले बजट से आस लगाए बैठे हैं कि उस दिन जरूर नई घोषणा होगी।

हिमाचल के तीन लाख से अधिक नियमित, अनुबंध, अस्थायी व आउटसोर्स कर्मचारियों को बजट से खास उम्मीदें हैं। उन्हें उम्मीद है कि बजट में खास तोहफे दिए जाएंगे। कर्मचारियों को उम्मीद है कि उन्हें नया वेतनमान केंद्रीय आधार पर दिया जाए। वेतनमान को लेकर राज्य पंजाब सरकार के साथ जुड़ा हुआ है। वहां आयोग की सिफारिशें आने और इन्हें लागू होने में काफी समय लगेगा। वे अलग वेतन आयोग गठित करने का भी आग्रह कर रहे हैं। टाइम स्केल के मामले अब तक अनसुलझे हैं। पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर कर्मचारी आंदोलित हैं। केंद्र ने अंतरिम बजट में कामगारों को भी पेंशन देने की व्यवस्था की है।

हिमाचल में विकास का सारा दारोमदार मजदूरों और श्रमिकों पर है। ऐसे में इस बजट से उन्हें आशा है कि मात्र पांच से दस रुपये वेतन बढ़ाकर उनके साथ मजाक नहीं होगा। ठेकेदारों के तहत सरकारी कार्यालयों में मजदूरी करने वालों को भी उम्मीद है कि सरकार ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर उनके लिए नीति बना महंगाई से राहत दिलाएगी। अभी भी मात्र 225 रुपये न्यूनतम दिहाड़ी निर्धारित की गई है, जबकि मनरेगा में तो इतनी कम दिहाड़ी रखी गई है कि कोई भी कार्य करने को तैयार ही नहीं हैं। आशा वर्करों सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी न्यूनतम दिहाड़ी की आशा है। प्रदेश में मकानों के निर्माण कार्य से लेकर सड़क, सामान ढुलाई, बर्फ से सड़कों के जाम होने पर उनकी सफाई का जिम्मा ऐसे मजदूरों पर ही है।

हिमाचल प्रदेश महिला सेवादल की अध्यक्ष ज्योति खन्ना कहती है कि मनरेगा के मजदूरों के दिन तो 120 किए गए हैं, लेकिन उन्हें 90 दिन भी काम नसीब नहीं हो रहे हैं। मजदूरों और श्रमिकों के अधिकारों के लिए लगातार लड़ाई लड़ रही हूं। न्यूनतम मजदूरी बहुत कम है और इस मंहगाई में गुजारा करना मुश्किल है। उन्होने कहा कि हिमाचल में मनरेगा में तो और भी कम मजदूरी है। मनरेगा की दिहाड़ी बढ़ाने से ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर हो रहे पलायन को भी रोका जा सकेगा।
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