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यहां की बसंत पंचमी है कुछ खास, रघुनाथ होते हैं शामिल, इसी दिन होती है होली शुरू

हिमाचल न्यूज़ | February 10, 2019 09:30 AM

हिमाचल न्यूज़
कुल्लू : कुल्लू में मनाई जाने वाली बसंत पंचमी का अपना अलग ही रंग है। यहां इसी से रंगों का उत्सव होली भी शुरू हो जाएगा जो अगले 40 दिन तक  जारी रहेगा। वृंदावन की तर्ज पर यहां पर भी बसंत पंचमी के साथ होली का आगाज भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा से हो जाता है। मथुरा में भी आज से रंगोउत्सव शुरू हो जाता है, भगवान कृष्ण के धाम में भक्त फूलों से होली खेलते हैं।

  कुल्लू के ढालपुर स्थित रथ मैदान में मनाए जाने वाले बसंत उत्सव में भगवान रघुनाथ अपने निवास स्थल से पूरे लाव लश्कर सहित रथ मैदान में पहुंचते हैं। इसके बाद भगवान रघुनाथ की पूजा अर्चना और भरत मिलाप होने के बाद भगवान रघुनाथ से लोग आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

  इसके बाद यहां पर भगवान के रथ यात्रा निकाली जाती है। रथ में विराज कर भगवान रघुनाथ अपने अस्थायी शिविर ढालपुर मैदान के बीचों बीच पहुंचते हैं। इस रथ को रस्सियों से खींचकर अस्थायी शिविर तक लाया जाता है और शाम को रघुनाथ जी वापस रघुनाथपुर चले जाते हैं।

  बसंत पंचमी के दिन भगवान रघुनाथ के रथ की रस्सियों को खींचना लोग शुभ मानते हैं ।

  वैरागी समुदाय का इस उत्सव में विशेष योगदान रहता है। जब भगवान रघुनाथ रघुनाथपुर से निकलते हैं तो हनुमान का रूप धारण किए बैरागी समुदाय का व्यक्ति लोगों पर गुलाल डालना शुरू कर देता है और इस के साथ ही यहां पर होली पर्व शुरू हो जाएगा जो अगले 40 दिन यानी होली महोत्सव तक चलेगा। माना जाता है कि हनुमान बना व्यक्ति जिसे गुलाल लगा दे, वह शुभ होता है।

  बैरागी समुदाय 40 दिनों तक हर रोज खेलेंगे होली
बसंत पंचमी से अगले 40 दिनों तक बैरागी समुदाय के लोग रोजाना रघुनाथपुर में भगवान रघुनाथ के चरणों में गुलाल डालकर होली खेलते हैं और घर-घर जाकर रंग लगाते हैं। साथ ही इस दौरान गाए जाने वाले विशेष बृज के गीत गाते हैं। कहा जाता है कि बैरागी समुदाय के अलावा इन गानों को कोई नही गा सकता है। होली से ठीक सात दिन पहले होलाष्टक मनाया जाता है जिसके तहत बैरागी समुदाय के लोग भगवान रघुनाथ के साथ उनके चरणों में गुलाल डालकर होली खेलते हैं। जिस तरह अन्य स्थानों पर होलिका दहन मनाया जाता है, उसे कुल्लू में फागली होती है।

  400 साल पुरानी है यह परंपरा
बसंत पंचती पर नई ऋतुओं के आगमन और हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है और इसे वर्ष का पहला त्यौहार माना जाता है। वृंदावन में जिस तरह से बसंत का त्योहार मनाया जाता है उसी तर्ज पर यहां पर भी पिछले 400 सालों से बसंत पर होली का आगाज हो जाता है, जो अगले 40 दिनों तक चलती है। उल्लेखनीय है कि मथुरा में भी आज से रंगोउत्सव शुरू हो जाता है, भगवान कृष्ण के धाम में भक्त फूलों से होली खेलते हैं।

Posted By : Himachal News 

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