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हिमाचल का ये आयुर्वेदिक काढ़ा बढ़ाएगा आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता, जानिए क्या है इसकी खूबियां

सोमसी देष्टा : शिमला | May 01, 2020 04:11 PM
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर मधुयष्टियादि कषाय (काढ़ा) लॉन्च करते हुए

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां कोरोना महामारी के दृष्टिगत लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य आयुर्वेदिक विभाग द्वारा तैयार किए गए मधुयष्टियादि कषाय (काढ़ा) का शुभारंभ किया। 

इस अवसर पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयुर्वेदिक काढ़ा प्रतिरक्षण तंत्र को मजबूत करने में सहायक होगा तथा इसे कोरोना योद्धाओं डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस, वरिष्ठ नागरिकों और राज्य के सभी कोरोना मुक्त हुए लोगों को निःशुल्क प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बजट 2020-21 में की गई घोषणा के अनुसार, यह आयुर्वेदिक दवा राज्य के सभी वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क प्रदान की जाएगी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना योद्धाओं को आयुर्वेदिक दवा मधुयष्टियादि कषाय (काढ़ा) निःशुल्क प्रदान करना, उनकी निःस्वार्थ सेवा के प्रति सरकार के आभार का द्योतक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन और ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान भी लोगों को शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। 

जय राम ठाकुर ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों और कोरोना योद्धाओं को संक्रमण का ज्यादा खतरा हैं, इसलिए आयुर्वेदिक विभाग की यह दवा इनकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों को इस दवा को निःशुल्क उपलब्ध करवाएगी, इसके साथ-साथ उन्हें सभी आयुर्वेदिक दवाएं भी निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी। 

मुख्यमंत्री ने इस दवा को डाक्टरों और पुलिस कर्मियों सहित अन्य कोरोना योद्धाओं को वितरित भी किया। 

सचिव आयुर्वेद जी.के. श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री का स्वागत कर उन्हें आश्वस्त किया कि विभाग इस दवा को लोगों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाएगा। 

राज्यपाल सराहा काढ़ा
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय को सचिव आयुर्वेद जी.के. श्रीवास्तव ने आज यहां राजभवन में आयुर्वेद विभाग द्वारा तैयार किया गया मधुयष्टियादि कषाय (काढ़ा) भेंट किया, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में लाभदायक होगा। राज्यपाल ने कहा कि आयुर्वेद एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो कोरोना महामारी से लड़ने में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में प्रभावशाली सिद्ध हो सकती है। उन्होंने आयुर्वेद आधारित उद्योगों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि हिमाचल में आयुर्वेद की अपार संभावनाएं हैं क्योंकि इस पहाड़ी क्षेत्र में कई जीवन रक्षक औषधियों का भंडार उपलब्ध है। उन्होंने आयुर्वेद की वैज्ञानिक संभावनाओं का पता लगाने के लिए योजना तैयार करने को कहा। उन्होंने मधुयष्टियादि कषाय (काढ़ा) तैयार करने के लिए विभाग के प्रयासों की सराहना की।



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