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खेत-खलिहान

कोरोना संकट में किसानों का सहारा बनेगी प्राकृतिक खेती

सोनू ठाकुर : कुल्लू | May 06, 2020 02:25 PM

वैश्विक महामारी कोरोना ने स्वास्थ्य के अलावा लगभग सभी अन्य क्षेत्रों में भी कई नए संकट पैदा कर दिए हैं। कृषि क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रह पाया है। किसानों और बागवानों के समक्ष इस समय कुछ चुनौतियां खड़ी हो रही हैं, लेकिन इन चुनौतियों के बीच किसानों को प्राकृतिक खेती के रूप में एक बड़ी उम्मीद भी दिखाई दे रही है। प्राकृतिक खेती को अपनाने के इच्छुक किसानों के लिए प्रदेश सरकार ने ‘प्राकृतिक खेती, खुशहाल योजना’ आरंभ की है। इस खेती के माध्यम से किसान न केवल घर पर ही उपलब्ध संसाधनों से अच्छी पैदावार करके अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण मेें भी अच्छा योगदान दे सकते हैं।

कुल्लू जिला में आतमा परियोजना के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। परियोजना निदेशक डाॅ. एसके ठाकुर का कहना है कि कोरोना संकट के इस दौर में हमें किसानों का भी विशेष अभिनंदन करना चाहिए। क्योंकि, अभूतपूर्व प्रकोप के बीच करोड़ों देशवासियों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित रखने के लिए किसान अपने खेतों-खलिहानों में अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं की तरह कार्य कर रहे हैं। इन योद्धाओं की आय बढ़ाने के लिए सरकार आतमा परियोजना के माध्यम से लगातार प्रयासरत है। इसी के मद्देनजर प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान योजना शुरू की गई है।

प्रसिद्ध कृषि विशेषज्ञ सुभाष पालेकर की प्राकृतिक विधि पर आधारित इस खेती में किसी भी तरह की रासायनिक खाद, कीटनाशक या अन्य रसायनों का बिलकुल भी प्रयोग नहीं किया जाता है। महंगे रसायनों और उर्वरकों के प्रयोग के बजाय प्राकृतिक खेती में केवल देसी गाय के गोबर व मूत्र तथा घर पर ही उपलब्ध प्राकृतिक सामग्री का ही प्रयोग किया जाता है। इन प्राकृतिक सामग्रियों के प्रयोग से खेती की लागत लगभग शून्य ही रहती है और पैदावार भी ज्यादा होती है। खतरनाक रसायनों से मुक्त खाद्यान्न और फल-सब्जियांे को बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं तथा किसानों को काफी अच्छी आय होती है। लिहाजा, प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है।

क्या है प्राकृतिक खेती की विधि
परियोजना निदेशक ने बताया कि सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती विधि में देसी गाय के गोबर, गोमूत्र और प्राकृतिक सामग्रियों से किसान घर पर ही बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत, सप्त धान्यांकुर अर्क आदि तैयार कर सकते हैं। कीटों पर नियंत्रण के लिए नीमास्त्र, अग्नि-अस्त्र, ब्रह्मास्त्र, दशपर्णी अर्क, नीम मलहम बना सकते हैं। फसलों में बीमारी रोकने के लिए जीवामृत, लस्सी, जंगल की कंडी व अन्य सामग्री का प्रयोग कर सकते हैं।

खंड स्तर पर नियुक्त किए गए हैं तकनीकी प्रबंधक
डाॅ. एसके ठाकुर ने बताया कि प्राकृतिक खेती की जानकारी हासिल करने के लिए आतमा परियोजना के निदेशक के मोबाइल नंबर 94180-79861, उपनिदेशक 94184-85981 और विषयवाद विशेषज्ञ के मोबाइल नंबर 82190-91614 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा खंड स्तर पर भी प्राकृतिक खेती के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए तकनीकी प्रबंधक और सहायक तकनीकी प्रबंधक नियुक्त किए गए हैं। इनके मोबाइल नंबरों पर किसान जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। कुल्लू खंड के किसान मोबाइल नंबर 88943-97353, 97362-45996, नग्गर खंड 98824-42829, 82198-07304 और 94187-20490, बंजार खंड 94597-60290, 98571-16110 और 98167-08202, आनी खंड 94595-83986, 94590-76986 और निरमंड खंड के किसान मोबाइल नंबर 98571-01970 तथा 98572-10364 पर संपर्क कर सकते हैं।

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