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विचार

हिमाचल में जीरो बजट खेती की और हकीकत

ठाकुर सुरेन्द्र सिंह | October 21, 2018 02:57 PM

ठाकुर सुरेन्द्र सिंह


हम हिमाचल वासियों के लिये बहुत ही गर्व का विषय है आचार्य-कुल के सूर्य आचार्य देवव्रत जी को अपने बीच महामहिम राज्यपाल महोदय के रूप में पाकर? राज्यपाल अक्सर राजनीति के मंझे खिलाड़ी ही को नियुक्त किया जाता है जो पक्ष की सरकार को विपक्षी काम करने के लिये आंखें दिखाएं या विपक्ष को सही सोच आगे रखने के लिये भी आंखें दिखाएं।

पहली बार अगर कोई राज्यपाल ज़मीन से जुड़ा आया है तो वह है महामहिम आचार्य देवव्रत जी जिन्होंने गाय को माता का दर्ज़ा क्यों दिया जाता है यह याद दिलाने और खूब समझाने में कसर नहीं छोड़ी है। जिस गैय्या में हिन्दुओं के तैंतीस करोड़ देवताओं का वास माना जाता है उसके गोबर से 'शून्य लागत कृषि' यानि 'Zero Budget Farming' जुमला नहीं है लेकिन शायद महामहिम भूल रहे हैं कि गैय्या की पूंछ पकड़ केवल वैतरणी पार हो सकती है जो मरने के बाद का गरूड़ पुराण का क़िस्सा है। भारतीय कृषि जिसे मैं 'ऋषि-कृषि' की संज्ञा देना चाहूंगा केवल गऊ माता पर ही निर्भर नहीं थी बाक़ी अन्य किसानों के मित्र -पशु भी इसका हिस्सा है जिसमें पक्षियों तक का भी क़िस्सा है? हम सेब बागवान हैं और सेब तथा अन्य फल-पौधों के लिये शून्य बजट कृषि इतनी लाभप्रद कदापि् नहीं हो सकती जिसके चलते हम विश्व-स्तरीय सेब एवं फल उत्पादक बन पायेंगे। यह मेरा निजि मानना और अनुभव है क्योंकि मैंने 2007 में प्रसिद्ध लेखिका रॉशेल कॉर्सन की पुस्तक 'Silent Spring' पढ़ने के बाद रासायनिक बागवानी को तिलांजलि दे दी थी, परन्तु मानसून की बारिश और धुन्ध से फफूंद रोग से सेब व पत्तियों को बचाने के लिये कोई जैव फफूंदनाशक मानक पदार्थ न मिल पाने के कारण वही रासायनिक फफूंदनाशी प्रयोग करने पड़े और आज मैं विश्व में मान्यता प्राप्त Good Agricultural Practices (GAP) का अनुसरण कर रहा हूं, जिसे Zero Budget Farming कैसे माना और कहा जाये?

दूसरी बात, महामहिम ऑईडियलिस्टिक बातें करते भूल जाते हैं या भुला देना चाहते है कि पशु-बलि और पशु मांस का चलन हमारी संस्कृति में था। मैंने सोशल मीडिया पर महामहिम का पशु-बलि पर भी वक्तव्य पढ़ा। मैं विशुद्ध शाकाहारी हूं, सुरापान नहीं करता मगर भौरप्पा की बहु चर्चित पुस्तक 'पर्व' मेरे छोटे से पुस्तक संग्रहालय में शोभायमान है और बार बार पढ़ता हूं। जब किसी विशिष्ट हिन्दु की अति हिन्दुत्ववादी टिप्पणी पढ़ता हूं?

महामहिम का शुरू में किया महिमा-मण्डन बस इस लिये किया कि उनके दायित्व गाय-गोबर, खेती-बाड़ी से अधिक सरकार की गाड़ी की गति को भी चलाये रखने का है? पिछले कुछ वर्षों से निरन्तर फल-उत्पादन में गिरावट पर चुप्पी, आढ़तियों और बिचौलियों की मनमानी पर सन्नाटा है और किसान और बागवान हितैषी बने फिरना हिमाचली किसान व बागवान के गाल पर झन्नाटा है?

बहुत हुआ अब मेरी सरकार Zero Budget Farming का प्रचार

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