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विचार

अभिषेक राणा ही हमीरपुर से क्यों ?

October 31, 2018 10:30 AM
विनय शर्मा 
आगामी लोकसभा चुनावों का बिगुल कभी भी बज सकता है और जिस तरह से केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार का ग्राफ लगातार गिर रहा है उससे कांग्रेस के नेता ज्यादा उत्साहित हैं और इसी बजह से टिकट के दावेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनमें सबसे बड़े नाम नेता विपक्ष
विनय शर्मा
 
मुकेश अग्निहोत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू का है। क्योंकि, दोनों ही बड़े नाम हैं और विधानसभा में विपरीत परिस्थितियों में चुनकर पहुंचे हैं। लेकिन, यह दोनों नेता अगली बार मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं इसलिए यह नहीं चाहेंगे कि खामखा पंगा लिया जाए। जैसे माननीय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पिछले लोकसभा चुनावों में मंडी से चुनाव लड़ने से मना कर दिया था क्योंकि भाजपा की तरफ से धूमल साहब ओर सत्ती के बाद वो भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। इस बार विधानसभा में पहुंचे रामलाल ठाकुर भी दावेदार माने जा रहे हैं लेकिन उनकी नज़र इस वक़्त प्रदेश कांग्रेस की सर्वोच्च कुर्सी पर है वहीं उनका पूरा फोकस इस बार नयनादेवी क्षेत्र पर है तो जाहिर सी बात है उनका मन लोकसभा चुनावों के लिए नहीं है। उनके समर्थकों ने भी ऐसी पोस्ट कम ही डाली हैं। नहीं तो ये लोग जरूर माहौल बनाते। अब दो और नाम हैं वो हैं गगरेट ओर घुमारवीं के पूर्व विधायक राकेश कालिया ओर राजेश धर्माणी और साथ मे युवा चेहरा अभिषेक राणा। कालिया ओर धर्माणी चुनाव हार चुके हैं इसलिए उनकी दावेदारी कमजोर हो चुकी है। अब बचे अकेले अभिषेक तो सुजानपुर के विधायक और धूमल साहब को पटखनी देकर प्रदेश की राजनीति में धूमकेतु बनकर उभरे राजेन्द्र राणा का हिसाब अभी बाकि है। वो धूमल साहब के बाद उनके बेटे को हराकर हिसाब सूद समेत चुकता करने की फिराक में हैं। इसीलिए सुजानपुर की बड़ी जीत के बाद भी वो चुप नहीं रहे और बेटे को मैदान में काफी पहले से उतारकर अपनी रणनीति पर अमल कर रहे हैं। क्योंकि, धूमल परिवार का बोरिया बिस्तर समेटने की उनकी क्षमता पर शायद ही किसी को शक हो। उन्होंने अभिषेक को युवा कांग्रेस की बड़ी जिम्मेदारी दिलवाने के बाद उन्हें हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में सक्रिय कर दिया। अभिषेक ने लगभग हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की हर विधानसभा को किसी न किसी बहाने नाप लिया है। निष्क्रिय अनुराग के लिए वो एक बड़ी चुनौती  बनकर उभर रहे हैं। अनुराग पर उनका वार भी क्रिकेट के बल्ले से हो रहा है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में क्रिकेट की डोर से अभिषेक ने लगभग हर युवा को गांठने का प्रयास किया है। टिकट के लिए जरूरी सबसे बड़ा राजा साहब का आशीर्वाद भी उन्ही पर है जिसके दम पर वो टिकट के बाकी दावेदारों पर भारी पड़ेंगे। बाकी सभी दावेदारों में अभिषेक सबसे युवा हैं। युवा मतदाताओं से कनेक्ट करने के लिए एक युवा सशक्त दावेदार रहता है। इसीलिए मेरा मानना है कि हमीरपुर में कांग्रेस की जीत के लिए राजेन्द्र राणा ओर राजा साहब का कॉम्बो धूमल परिवार पर बहुत भारी पड़ेगा। राजा साहब की सक्रियता ओर हमीरपुर पर फोकस कोई यू ही नहीं है। उनका निशाना सीधे चिड़िया की आंख पर है।

लेखक हिमाचल हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायलय शिमला में अधिवक्ता हैं 
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