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बिजनेस

जंगी-थोपन बिजली परियोजना: सरकार और एसजेवीएन के बीच अगले माह होगा एमओयू

November 02, 2018 05:52 PM

हिमाचल न्यूज़

शिमला : 780 मेगावाट की क्षमता वाली जंगी-थोपन बिजली परियोजना का निर्माण कार्यशुरू करने के लिए प्रदेश सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। सरकार और एसजेवीएन के मध्य अगले महीने एमओयू हस्ताक्षर होना है। इससे पहले प्रदेश सरकार ने एसजेवीएन से टाइम लाइन मांगी है। इसमें यह पूछा गया है कि निर्माण कार्य कब से शुरू होगा और परियोजना कब तक पूरी होगी। इसके साथ-साथ सभी औपचारिकताओं की भी टाइम लाइन मांगी है।

उल्लेखनीय है कि गत 22 अक्तूबर को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रदेश सरकार ने जंगी-थोपन बिजली परियोजना एसजेवीएन को देने का फैसला किया था। इसके मद्देनजर अब सरकार ने भी कवायद शुरू कर दी। ब्रेकल, अदानी और रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों की जंग में उलझे किन्नौर के जंगी-थोपन बिजली प्रोजेक्ट पर सरकार ने एसजेवीएन को दे दिया है। करीब 12 साल से यह प्रोजेक्ट अटका हुआ था। सतलुज बेसिन पर एसजेवीएन पहले ही दो बिजली परियोजनाएं चला रहा है। हालांकि जंगी-थोपन बिजली परियोजना की क्षमता 960 मेगावाट थी, लेकिन सरकार ने इसमें 180 मेगावाट की क्षमता कम कर दी। कुल मिला कर अब यह प्रोजेक्ट 780 मेगावाट का होगा। अब इस परियोजना की क्षमता 360 मेगावाट कम हो गई है। इस प्रोजेक्ट को लेकर सरकार ने ब्रेकल के नाम पर अदानी ग्रुप की ओर से जमा करवाए गए 280 करोड़ के अपफ्रंट प्रीमियम को जब्त कर लिया था। पूर्व कांग्रेस सरकार के समय इसे लौटाने के लिए कई कोशिशें हुई थी, जो सिरे नहीं चढ़ पाई थीं। अब सरकार ने लौटाना तो दूर इस प्रोजेक्ट को ही स्वतंत्र बिजली उत्पादकों से बाहर कर पीएसयू को दे दिया।

2006 से विवादों में रहा यह प्रोजेक्ट
वर्ष 2006 में राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट का टेंडर किया था और यह काम ब्रेकल को आवंटित किया था। ब्रेकल ने अदानी से लेकर अपफ्रंट मनी की 280 करोड़ की राशि सरकार को दी। यह मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट तक चला गया। न्यायालय ने राज्य सरकार को इस प्रोजेक्ट को अपने स्तर पर फैसला लेने के निर्देश दिए। सरकार ने 2009 में इस प्रोजेक्ट के आवंटन को रद्द कर दिया था। बाद में सरकार ने रिलायंस को प्रोजेक्ट सौंप दिया, लेकिन रिलायंस भी पीछे हटा। पिछले 12 वर्षों से विवादों में रहा यह प्रोजेक्ट सरकार ने एसजेवीएन को सौंप दिया।

"जंगी-थोपन बिजली परियोजना निर्माण शुरू करने के लिए हमने एसजेवीएन से टाइम लाइन मांगी है और उसके बाद संभवत: अगले महीने एमओयू साइन भी होगा।"
-प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव ऊर्जा

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