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हिमाचल

अब बारी सुरंगों की : घटेंगी दूरियां, बाधा नहीं बनेंगे पहाड़

हिमाचल न्यूज़ : शिमला | November 08, 2018 09:12 AM
रोहतांग टनल PHOTO : Ramesh Kanwar

हिमाचल में फोरलेन, नेशनल हाई वे के बाद अब सुंरगों की चर्चा होने लगी है. सूबे में दर्जनों सुरंगों का निर्माण हो चुका है, दर्जनों का काम युद्ध स्तर पर चला है और दर्जनों सुरंगों को बनाने की प्रक्रिया जोरों पर है. यूं तो सुरंगो का निर्माण अंग्रेज़ों के जमाने में शुरू हुआ था, लेकिन नए दौर में सुरंगों के निर्माण की रफ्तार से हिमाचलियों के सपने साकार हो रहे है? प्रदेश इस दिशा में कदम रख चुका हैं. 

लारजी टनल PHOTO :Third Party
 प्रदेश में सुरंग निर्माण की पहल एक सदी पहले अग्रेजों ने की थी. कालका से शिमला शहर में भी दूरियां पाटने के लिए के लिए 103 सुरंगों का निर्माण पहले ही किया गया है. पहाड़ी पर बसे शिमला शहर के लिए अंग्रेजो ने ही सुरंगो के निर्माण की पहल की थी. लारजी बिजली परियोजना के निर्माण के चलते कुल्लू के प्रवेश द्वार औट के पास भी लगभग तीन किमी. यातायात सुरंग देश की सबसे लंबी सुरंगो में से एक है. कबायली क्षेत्र लाहौल स्पीति से लेह को जोडऩे के लिए बन रही रोहतांग सुरंग को न केवल रोहतांग के पार की उस दुनियां की दूरी घटाने के लिए बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जोगिन्द्र नगर शिल्हवधानी हो कर कुल्लू की लगघाटी के भू भू जोत कर सुरंग बनाने की योजना भी आजकल सुर्खियों में है. प्रदेश सरकार भी इस सुरंग के निर्माण का ऐलान कर चुकी है. आनी, निरमंड, रामपुर, किन्नौर, शिमला आदि की दूरियां घटाने के लिए औट लूहरी राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर जलोड़ी जोत हो कर और बशलेउ जोत होकर बठाहड़ सरौहण सुरंग की गूंज भी लोकसभा चुनाव से पूर्व लोकानुभाव वादों का हिस्सा बन चुकी है. जोगिन्द्र नगर से लेह तक प्रस्तावित रेल लाईनो के भी सैकड़ो सुरंगों से होकर गुजरने की भी चर्चा है.

प्रदेश में सड़कों का जाल बिछ गया है. सड़कों के बाद अब प्रदेश में सुरंगों निर्माण भी जोरों पर है. तो अब सड़कों के बाद सुरगें और रोपवे हिमाचल के पहाड़ो की दूरियां बंटेगी. इससे दूरियां घटेगी, पहाड़ भी बाधा नहीं बनेंगे.

 विकट भौगोलिक परिस्थितियां और ऊंचें-ऊंचें पहाड़ प्रदेश मे बनने वाली सड़क निर्माण के मार्ग में न केवल वाधा बने हुए हैं बल्कि इन्ही पहाड़ों की बदौलत एक स्थान से दूसरे स्थान तक की दूरीयां भी बढ़ी हैं. कुल्लू क्षेत्र के लोगों की माने तो सुंरगें बनने से सर्दियों में हिमपात भी लोगों की आवाजाही में बाधा नहीं बनेगा.

आनी क्षेत्र के रोशन लाल कहते है कि बीच में पडऩे वाले दर्रो की वजह से भी जिला मुख्यालय पहुंचने में उन्हें पूरा दिन लगता है वहीं सुरंग बनने से भी जिला मुख्यालय से उनकी दूरियां चंद घंटों की रह जाएगी. केलांग के अशोक कहते हैं कि रोहतांग में सुरंग बनने से कबायली क्षेत्र सर्दियों में भी शेष दुनियां से जुड़ा रहेगा.

इस बीच उदयपुर और पांगी के बीच भी सुरंग निर्माण का वादा करते हुए राजनिजिज्ञ सुनाई देने लगें है. प्रदेश के चंबा जिला के लोगों का भी मानना है कि धौलाधार की पहाडिय़ो के नीचे से सुरंग बनने से धर्मशाला और चंबा के बीच की दूरी घटेगी. सलूणी उपमंडल की खरौटी पंचायत के पूर्व उपप्रधान चमन और हिमगिरी क्षेत्र के कर्म सिंह का कहना है कि यदि सुरंगों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ायें तो न केवल दूरियां घटेगी बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों का कायाकल्प भी होगा. इन लोगो का मानना है कि इससे प्रदेश में रेलवे के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेगी.

किरतपुर-मनाली फोरलेन की टनल PHOTO : Third Party
 प्रदेश में सुरंगों के निर्माण की दिशा में बढ़ते कदम और चर्चा से निकट भविष्य में प्रदेश में सुरंगों का जाल बिछने की भी अभी से संभावनाएं दिखाई देने लगी है. ऐसे भी लोग हैं जिनका मानना है कि इस दिशा में नीजि क्षेत्र भी प्रदेश का सहयोग करने के लिए आगे आ सकता है.

कुल्लू के विधायक सुंदर ठाकुर भी कहते है कि भू-भू जोत होकर और रोहतांग में बनने वाली सुरंग से घाटी की तस्वीर बदल जाएगी.

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कहते है कि प्रदेश में अब सड़कों के बाद भविष्य में सुरंग निर्माण दूरियां घटाने में अह्म भूमिका निभाएगा.

पूर्व सांसद महेश्वर सिंह भी सुरंगो को पहाड़ की आवश्यकता मानते हैं.

बहरहाल सुरंगो का मुद्दा जहां लोकसभा चुनावों से पूर्व एक बार फिर से गुजंने लगा है और सरकार इनके निर्माण को प्राथमिकता देने के वादे करती दिखाई दे रही है. पर्यावरण चिंतकों को भले ही सुरंग निर्माण रास न आए लेकिन लोग मानते हैं कि सुरंगे ही अब पहाड़ की दूरियां कम कर्मे में अहम भूमिका निभाएगी.

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