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व्यंग्य

काश ! डाक्टर को एक फोन कर पाता

साहित्यिक डेस्क : हिमाचल न्यूज़ | November 08, 2018 09:30 AM
फाइल फोटो

घुमंतू पिछले कुछ दिनो से परेशान था और उसने क्षेत्रीय अस्पताल में जाने के बारे मं सोचा और सुबह ही घर से निकल पड़ा. अस्पताल पहुंचते ही घुमंतु ने अपने लिए पर्ची बनवाई और पर्ची जमा करने डाक्टर के कमरे के बाहर पहुंच गया, लेकिन वहां का दृश्य कुछ और ही था. डाक्टर के कमरे के बाहर काफी भीड़ थी और कुछ लोग अस्पताल के कर्मचारियों से डाक्टर को जल्दी बुलाने का आग्रह कर रहे थे, उनके एक साथी की हालत काफी गंभीर थी और डाक्टर साहब........... वे राउंड पर थे.

काफी मान मनुहार के बाद एक कर्मचारी डाक्टर को बुलाने के लिए राजी हुआ और कुछ देर आकर बोला डाक्टर साहब नहीं आ सकते. डाक्टर साब किसी खास शख्स के नीदं न आने की जांच में व्यस्ती है, (ये अन्दर की बात घुमंतू को उसी कर्मचारी ने बताई) मरीज की हालत नाजुक देखकर उसके साथी उसे फौरन किसी दूसरे अस्पताल (प्राइवेट) ले गये.

खैर ..........घुमंतू ने अपनी पर्ची का नम्बर 25 या 26 नोट कर लिया और इतंजार करने बैठ गया. डाक्टर साहब के राउंड से आते-जाते 2 घंटे से उपर समय बीत गया और कमरे के बाहर करीब 50-60 मरीज और इतने ही उनके देखभाल करने वाले लोग जमा हुए. कुछ लोग दूर दराज के गांवो से आए थे. ढाई घंटे के बाद अचानक डाक्टर साहब प्रक ट हुए और सीधे कमरे मे चले गए और उनके हाथ मे कुछ और खास लोगो की पर्चियां थीं, और वे खास लोग भी डाक्टर के साथ-साथ उनके कमरे में चले गए. लगभग पौने घंटे के बाद वे लोग डाक्टर साहब को कभी उनके घर आने को कहते हुए निकले.

जी हां.....जी जी...... मै देखता हूं ......आप चिंता मत कीजिए. .........अनुपमा जी....जी....मै अच्छी तरह देख लूगां जी. और उन्होने फोन रखते ही पर्ची के ढेर को टटोलना शुरू किया. ढेर में पर्ची न मिलने पर उन्होने एक कागज उठाया और उस पर कुछ लिखा. सहायक ने वह पर्ची ली और पुकारा. अनुपमा...... और आर्कषक सी दिखने वाली महिला जो अभी-अभी ठीक से पहुंची भी नहीं थी कि भीड़ से रास्ता बनाती हुई डाक्टर के कमरे मे पहुचीं.

 घुमंतू ने चैन की सांस ली और अब अपनी बारी का इन्तजार करने लगा. उसे लग रहा था कि उसकी बारी अगले घंटे भर में ही आयेगी क्योंकि उसका पर्ची नंबर 25 या 26 जो था, लेकिन यह क्या बड़ी बड़ी तकलीफों वाले 20 लोगो का मुआयना डाक्टर ने महज 15 मिनट में ही कर लिया. इतना ही नहीं अपनी काबलियत दर्शाते हुए कुछ मरीजो को तो उन्होने बोलने का मौका दिए बिना उनकी हालत पहचान ली और दवांईयां लिख कर उन्हे भेज दिया. काश ! सभी प्राईवेट अस्पतालों के डाक्टर भी इतने काबिल होते.

अब घुमंतू को लगने लगा कि उसकी बारी आधे घंटे में ही आ जाएगी और वह शीघ्र ही अपनी तकलीफ बयां करने के लिए दरवाजे के पास ही खड़ा हो गया. तभी डाक्टर का मोबाईल फोन बज उठा. डा. साहब के बात करने के ढग़ से साफ पता चल रहा था कि किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति का फोन है.

जी हां.....जी जी...... मै देखता हूं ......आप चिंता मत कीजिए. .........अनुपमा जी....जी....मै अच्छी तरह देख लूगां जी. और उन्होने फोन रखते ही पर्ची के ढेर को टटोलना शुरू किया. ढेर में पर्ची न मिलने पर उन्होने एक कागज उठाया और उस पर कुछ लिखा. सहायक ने वह पर्ची ली और पुकारा. अनुपमा...... और आर्कषक सी दिखने वाली महिला जो अभी-अभी ठीक से पहुंची भी नहीं थी कि भीड़ से रास्ता बनाती हुई डाक्टर के कमरे मे पहुचीं.

महिला की इस उंची पहुंच पर घुमंतू परेशान नहीं हुआ. उसे भरोसा था डाक्टर की काबिलियत पर कि वे उसे एक दो मिनट में देख लेंगे.
लेकिन वह न जाने किस रोग से पीडि़त थी कि डाक्टर के समझने में पूरे 45 मिनट लगे.

खैर महिला के जाते कुछ लोग सूट-बूट पहने डाक्टर के कमरे में गए और डा.साहब उनका मुआयना करने में व्यस्त हो गए. घुमंतू से यह बर्दाश्त नहीं हुआ और वह भी डाक्टर के कमरे में जा पहुंचा और उसने डा. से इस बारे में शिकायत की, डा. ने बेरूखी और आखें तरेर कर कहा हमें अपना काम पता हैं तुम हमें मत सिखाओ, और घुमंतू को कमरे से बाहर निकाल दिया. घुमंतू उदास हो कमरे से दूर बैठ अपनी बारी का इंतजार करने लगा. तभी उसे वह महिला दिखाई दी. घुमंतू के मन में दया जागी और उसने उस महिला से उसकी बिमारी के बारे में पूछा. जो काफी दवांईयां लेकर वापिस जा रही थी. महिला ने बताया कि वह अपने बालों के झडऩे और चेहरे के रूखे पन को लेकर पिछले तीन महीने से काफी परेशान थी. डा. के कमरे के बाहर अन्य मरीजो का तो काफी बुरा हाल था.

डा. के लंच पर जाने से चंद मिनट पहले ही उसकी बारी आई और डा. ने उसे सिर्फ एक मिनट में ही दवाईयां लिख कर वापिस भेज दिया. सीधा-साधा घुमंतू दवा वितरण कक्ष तक पहुंचा तो उपस्थित कर्मचारी ने बताया कि यह दवाईयां अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं उसे बाहर से लेनी होगी. घुमंतू ने पर्ची हाथ में लिए अस्पताल से बाहर की ओर रूख किया और सोच रहा था कि काश! मैं भी डॉक्टर को सिर्फ एक फोन करवा सकता.

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