हिंदी ENGLISH ਪੰਜਾਬੀ Monday, November 19, 2018
Follow us on
हमारे देवालय

न्याय का अनूठा दरबार : न वकील... न दलील... सिर्फ एक कील

फीचर डेस्क : हिमाचल न्यूज़ | November 08, 2018 10:08 AM
मार्कडेय ऋषि का देव रथ और मंदिर PHOTO : Facebook

देव भूमि में देवताओ के प्रति अटूट आस्था रखने वाले लोगो की कमी नहीं हैं. इसका जीता-जागता प्रमाण पेश करते है, कुल्लू और मंडी जिला के सैंकड़ो देवस्थल. पहाड़ों में देव-आस्था शुरू से ही बलबती रही है. युग बदल गए परिवेश बदल गया लेकिन यदि कुछ नहीं बदला तो वो है देव आस्थाएं. न्याय की बात हो या दिल की मुराद, यहां हर मन्नत देवताओं के द्वार में पूरी होती है. न्याय के लिए आज भी लोग देवता का द्वार खटखटाते हैं. देव-आस्था की अनूठी मिसालें पहाड़ों में आज भी जीवंत हैं. ऐसी ही एक परम्परा का निर्वाहन कर रहे हैं बालीचौकी क्षेत्र की रक्रवाहम पंचायत के बागी के लोग. यहां के गांववासी आज भी न्याय पाने के लिए कोर्ट -कचहरी का दरवाजा नहीं खटखटाते, बल्कि अपने इष्ट देवता मारकंडा के मंदिर की दीवार पर कील ठोंक कर फरियाद करते हैं.

कील गाड़ करते हैं न्याय की फरियाद
बालीचौकी के कोटलू में मारकंडा ऋषि का मंदिर यहां के लोगो के लिए अनूठा न्यायलय बना हुआ है. यहां पर लोग कील गाड़ कर देवता से अपनी फरियाद करते है, जब उन्हे इंसाफ मिलता है तो कील उखाड़कर मामला बंद कर दिया जाता है. यही कारण है कि यहां मंदिर के पास व मंदिर में लोहा ही लोहा नजर आता है. कीलों के रूप में लोहे के विभिन्न औजार व कील मंदिर के आस-पास के खभों पर गाड़ी गई हैं. मंदिर में कीले गड़ती रहती है और धीरे -धीरे लोग अपनी-अपनी कीले उखाड़ते रहते हैं. लोग कील गाड़कर कोटलू मारकंड़ा के न्यायलय में मामला दर्ज करते हैं.

ये मामले आते हैं मारकंडा ऋषि के दरबार में
जिसकी किसी भी प्रकार की चोरी हुई हो या अन्य सामाजिक या आर्थिक नुकसान. कोई भी व्यक्ति कोटलू मारकंडा के दर पर कील गाड़ कर मामला दर्ज करवा सकता है. यहां उल्लेखनीय यह भी है कोटलू मारकंडा के दर पर किसी भी प्रकार का मामला दर्ज करने की फीस नहीं ली जाती. इस न्यायलय में न तो कभी छुटटी होती है और न ही समय की पाबंदी होती हैं.

अपराधी मंदिर की चौखट पर स्वयं कबूल करता है अपना अपराध
यहां के लोगो का विश्वास है कि कील गाड़ने के बाद उनका कुल देवता अपने बलबूते पर जांच शुरू कर देते हैं. अपराधी स्वयं मंदिर की चौखट पर अपना अपराध कबूल करता है. और कील उखाडऩे का आग्रह करता है. लोग कहते हैं कि जब तक कील उखाड़ी नहीं जाती अपराधी और उसके परिजनों को सजा का सिलसिला जारी रहता है. गौरतलब है कि दूसरा कोई भी व्यक्ति इस कील को उखाड़ नहीं सकता. इस कील को गाडऩे वाला पीड़ित व्यक्ति ही इसे उखाड़ सकता हैं.

माफीनामे पर देते हैं बलि
अपराधी को माफीनामे या समझौते के तौर पर बकरे की बलि चढ़ानी पड़ती है. एक अनुमान के अनुसार इस न्यायलय में आज भी लगभग 250 मामले लंबित पड़े हैं, जिनमें से 30 मामले दलित परिवारो के हैं. यहां प्रति सप्ताह किसी न किसी मामले का निपटारा होता रहता है.

और भी न्यायालय के ऐसे दरबार  
कुल्लू घाटी में और भी कई देव अदालतें हैं जहां लोगो को बिना कुछ खर्च किए न्याय मिलता है. कोर्ट कचहरी और पुलिस पर भले ही लोग विश्वास न करें या पक्षपात के लिए उगंली उठाएं लेकिन देवता के निर्णय के प्रति लोगों की पूरी श्रद्धा है.

Have something to say? Post your comment