हिंदी ENGLISH ਪੰਜਾਬੀ Wednesday, December 19, 2018
Follow us on
मनोरंजन

इन्होंने दिया हिमाचली संगीत को आधुनिक रूप

आलम पोर्ले | November 09, 2018 09:28 AM
संगीतकार एस.डी. कश्यप

बेशक आज हिमाचली संगीत अत्याधुनिकता के दौर से गुजऱ कर यहां- वहां, जहां-तहां बजता हुआ सुनाई देता है. हिमाचली संगीत का डिजिटल दुनियां में एक बहुत बड़ा बाज़ार आज हमारे समक्ष है. गांव की दहलीज़ लांघ कर पहाड़ी संगीत की सौंधी महक मायानगरी तक अपनी खूश्बू बिखेर चुकी है. यह सब यूं ही नहीं हुआ, कुछ शख्सियतों ने इसके लिए पहल की अभियान छेड़ा. ऐसे लोगों में जाने माने संगीतकार एस डी कश्यप को यदि अगुआ कहा जाए तो कोई हर्ज नहीं होगा. इस अभियान में वे लोकापवाद का पात्र भी बने रहें. लोगों के विरोध के बावजूद भी हिमाचली संगीत को आधुनिकता के साथ ज़माने के साथ कदमताल की. यही कारण है हिमाचल संगीत को वर्तमान रूप देने का पूरा श्रेय संगीत प्रेमी एवं विलक्षण प्रतिभा के धनी सिने संगीतकार एस. डी कश्यप को ही जाता है.

संगीतकार एस.डी. कश्यप
 एस डी कश्यप ने हिमाचली संगीत को एक सूत्र में पिरोने के साथ-साथ उसे बुलंदियों पर पहुंचाया है. जिस प्रकार स्व. प्रार्थी जी ने कुल्लवी नाटी को नया रूप देकर उसे अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई ठीक उसी प्रकार हिमाचली गीतों में हल्का सा लचीलापन देकर उसे नये रूप में पिरोकर जब कश्यप ने पेश किया तो हिमाचली संगीत के न केवल हिमाचल के लोग बल्कि देश और दुनियां में संगीत प्रेमी दीवाने हो गए. एस.डी कश्यप के सफल प्रयासों से आज हिमाचली संगीत ने पूरी तरह से इंडस्ट्री का रूप ले लिया है.

हिमाचली गीतों में हल्का सा लचीलापन देकर उसे नये रूप में पिरोकर जब कश्यप ने पेश किया तो हिमाचली संगीत के न केवल हिमाचल के लोग बल्कि देश और दुनियां में संगीत प्रेमी दीवाने हो गए.

 देखा जाए तो विकट भौगोलिक परिस्थितियां, भिन्न-भिन्न बोलियां और पहाड़ो में गूंजती स्वर लहरियां कभी पहले विशाल पर्वत श्रृखलाओं के बीच खो सी जाती थी. पिछले तीन दशक में वही स्वर लहरियां हिमाचल प्रदेश के कोने- कोने में ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सो में मनोरंजन का ज़रिया बन गई है. एसडी कश्यप के योगदान से आज हिमाचली संगीत एक इंडस्ट्री का रूप ले चुका हैं और देश-प्रदेश की करीब 100 छोटी बड़ी व्यवसायिक कंपनियां हिमाचल के संगीत के क्षेत्र में व्यवसायिक रूप से जुड़ी है.

'डिस्को नाटी' से हिमाचली संगीत की शुरुआत
आज से चार दशक पूर्व एस.डी. कश्यप मायानगरी में सिने संगीतकार के रूप में संघर्षरत थे तो उन्होने मुबंई में ही 'साउंड़ ऑफ़ मांउटेन' म्यूजिक कंपनी का गठन कर पजांब की प्रसिद्ध गायिका सविता साथी के साथ मिलकर हिमाचली ऑडियो कैसेट 'डिस्को नाटी' बाजार में उतारी. इस कैसेट ने बाजार में सफलता के झंडे गाड़ दिए थे. तब किसी ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन हिमाचली संगीत इतनी बड़ी इंडस्ट्री का रूप ले लेगा.

समय तीव्रता से बढ़ता गया. तीन दशक बीत गए. हिमाचली संगीत नए रूप में जम चुका है. कश्यप ने मायानगरी की चकाचौंध से दूर अपनी मातृभूमि के सुदूर गांव सकरोहा में स्वयं रिकॉर्डिंग स्टूडियो स्थापित कर हिमाचली संगीत के सम्बर्धन का बीडा़ उठाया. हिमाचल संगीत की सैंकड़ों कैसटों का निर्माण किया.

संगीतकार एस.डी. कश्यप बेटी शिवांगी के साथ. शिवांगी बालीबुड में संगीत निर्देशक है. फिल्म तेरे मेरे फेरे में शिवांगी ने संगीत दिया है. जल्द ही शिवांगी के संगीत निर्देशन में कई और फ़िल्में आने वाली है.
आलोचना का शिकार भी हुए
हिमाचली संगीत को नई दिशा देने के प्रयास में कुछ गीतों को लेकर एस डी कश्यप को आलोचनाओं का शिकार भी होना पड़ा. लोकापवादों की परवाह किए वगैर हिमाचली संगीत को नई दिशा प्रदान कर उन्होने संगीत के क्षेत्र में भारी सफलता प्राप्त की. एस.डी. कश्यप के सानिध्य में प्रदेश के सैंकड़ों कलाकारो ने नयी पहचान कायम की. आज हिमाचल के हज़ार से भी अधिक कलाकारों में से 75 फीसदी कलाकार एस.डी.कश्यप द्वारा तराशे गये फनकार हैं.

एसडी कश्यप के संगीत का सफर
1972 से उन्होंने सहायक संगीत निर्देशक के तौर पर कार्य किया। 1976 में पहली बार स्वतंत्र रूप से संगीत निर्देशन का कार्यभार संभाला और अपने मित्र प्रसिद्ध अभिनेता डैनी डेग्जोपा के साथ कई नाटको का सृजन व मचंन किया. 1980 में पीकॉक फिल्म्स की पहली फीचर फिल्म कोबरा में संगीत देकर बालीवुड में अपने कदम पूरी तरह से जमा लिए. फिर जल्लाद, अनोखा मोड़, एक और आसमां, आदि फिल्मो में संगीत देकर मायानगरी में हिमाचली संगीत की झलक पिरोयी.

हिमाचली संगीत को उनकी पहचान दिलाने की ललक इन्हे मायानगरी में वापिस गांव की ओर ले आई. 1988 मे उन्होंने पनारसा मंडी में 'साउड़ ऑफ मांउटेन' के नाम से हिमाचल का पहला डिजिटल रिकार्डिग स्टूडियो स्थापित कर हिमाचली संगीत के इतिहास में एक ओैर अध्याय जोड़ा.

एक हजार से अधिक कलाकारों को दिया मौका
उनके संगीत निर्देशन में अब तक एक हजार से भी अधिक कलाकारो ने अपने हुनर का जलवा दिखाया. एस.डी.कश्यप के संगीत निर्देशन में आशा भौसले, अनुराधा पौडवाल, कविता कृष्णमूर्ति, विनोद राठौर, मुहम्मद अजीज, विनोद सहगल, जय शिवराम, राजकुमार, सविता साथी, डेनी डेग्ंजोग्पा जैसे पाश्र्व गायको ने भी अपनी आवाज को सुरो में ढाला है, जबकि हिमाचल के तो अधिकांश गायक उन्ही की ही खोज हैं.

बात चाहे कागंड़ा के धीरज शर्मा, संजीव दीक्षित, महासू के मोहन सिंह, कुलदीप शर्मा शारदा शर्मा, बाहरी सिराज के हेतराम भारद्वाज की हो या कुल्लवी गायकों में बलबीर ठाकुर, धमेंद्र शर्मा, ठाकुर दास राठी, नरेंद्र ठाकुर सरीखे कलाकारों की, इन सबको पहली नज़र में पहचान कर इनके हुनर को एस.डी.कश्यप ने ही परखा और तराशा. आज हिमाचली संगीत जगत में बॉलीवुड की नामी हस्तियां भी अपना भाग्य आजमा रही हैं. हिमाचल के वीडियो एलबम का निर्माण भी उन्ही की सोच का नतीजा हैं.

Have something to say? Post your comment
और मनोरंजन खबरें