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लाइफ स्टाइल

सावधान ! बढ़ते कोलेस्ट्रोल और चर्बी से

हेल्थ डेस्क : हिमाचल न्यूज़ | November 13, 2018 08:07 AM

हां, चर्बी-चर्बी में भी अंतर होता है। ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं कि कोलेस्ट्रोल और भोजन में मौजूद वसा के बीच क्या अंतर है। अगर आप अपना वजन घटाना चाहते हैं, या अपने ह्दय को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो पहले आपको इन दोनों के बीच के फर्क के बारे जानना होगा।

चर्बी अकेले ही आपका वजन बढ़ा सकती है लेकिन कोलेस्ट्रोल अकेले आपका वजन नहीं बढ़ा सकता है। 10 में 9 लोगों के मोटापे की वजह चर्बी और कोलेस्ट्रोल दोनों का पाया जाना है। जब तक कोलेस्ट्रोल सामान्य मात्रा में शरीर में मौजूद रहता है तब तक ह्दय की धमनियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। सामान्य मात्रा में कोलेस्ट्रोल का होना स्वास्थय के लिए बहुत जरूरी है। कुदरत द्वारा हमारे शरीर में यकृत में इसका उत्पादन होता है। अगर शरीर में जरूरत से ज्यादा कोलेस्ट्रोल हो तो एयेस्कलेरोसिस रोग होता है। इस रोग में धमनियों में मोम जैसा पदार्थ जम जाता है जिससे वे बहुत संकरी हो जाती हैं। इससे रक्त का प्रवाह सही तरह से नहीं हो पाता है तो दिल का दौरा पड़ जाता है।
कोलेस्ट्रोल दो प्रकार के होते हैं-

1.एच.डी.एल.कोलेस्ट्रोल : यह अधिक घनत्व वाला लिपोप्रोटीन (हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) होता है। इसका काम रक्त के प्रवाह का मार्ग साफ करना है। इससे ह्दय तंत्र का काम सुचारू रूप से होता है। इसे हम 'अच्छा कोलेस्ट्रोल' कह सकते हैं।

2. एल.डी.एल.कोलेस्ट्रोल : यह कम घनत्व वाला लिपोप्रोटीन (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन)होता है। यह चर्बी के साथ मिलकर धमनियों में जम जाता है जिससे रक्त के बहाव में रूकावट आती है व इससे ह्दय रोग होने का खतरा रहता है। इसे हम 'बुरा कोलेस्ट्रोल' कह सकते हैं।
वसा क्या है?

शरीर को स्वस्थ बनाये रखने के लिये हम अपने आहार में जिन आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल करते हैं, उनमें वसा या फैट का महत्वपूर्ण स्थान है। यह शरीर के लिए अनेक प्रकार से उपयोगी होती है। मुख्य रूप से यह शरीर को ठंड के प्रभाव से बचाती है, शरीर के अंगों को चोट लगने से बचाती है, त्वचा को निरोग रखती है। वसा न केवल शरीर की विभिन्न क्रियाओं के सुचारू रूप में होने में मदद करती है,बल्कि उसकी सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है। आवश्यक पौष्टिक पदार्थों के लिए इसका सेवन करना भी जरूरी है।

आमतौर पर वे सभी खाद्य पदार्थों, जो वसामय यानि स्पष्ट रूप से चिकनाई वाले दिखाई देते हैं, वसा कहलाते हैं, जैसे-तेल, घी, वनस्पति घी, मक्खन इत्यादि। लेकिन कुछ ऐसे भी खाद्य पदार्थ होते हैं, जो स्पष्ट रूप से चिकनाई वाले दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन होते वे वसा ही हैं, जैसे-दूध, पनीर, तिल, सोयाबीन, अखरोट, बादाम, पिस्ता व कुछ अनाज इत्यादि।

 वसा दो प्रकार की होती है
1. वनस्पतिक वसा : यह असंतृप्त वसा होती है। वनस्पति घी और रासायनिक हाइड्रोजिशन की प्रक्रिया से वनस्पति तेल सामान्य तापमान में ठोस रूप ले लेता है। यह उतनी नुकसानदेह नहीं होती है जितनी नुकसानदेह संतृप्त चर्बी होती है। जहां तक मोटापे का सवाल है दोनों प्रकार की चर्बी मोटापा बढ़ाने वाली होती हैं। अगर शरीर में ग्रहण की जाने वाली कुछ कैलोरियों का 30 प्रतिशत से अधिक भाग इसी के द्वारा मिल रहा है तो आपका मोटा होना तय है।

2. जांतव चर्बी : सभी तरह के मांस और दूध में पाई जाने वाली चर्बी इसी श्रेणी में आती है। यह संतृप्त होती है। यह हमारे शरीर की वसा कोशिकाओं में वृद्धि करती है जिससे वजन बढ़ता है। यह खून मेें बूरे कोलेस्ट्रोल के साथ मिलकर मस्तिष्क और ह्दय की ओर खून का प्रवाह कम कर देती है लेकिन शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन व अन्य आवश्यक पौष्टिक पदार्थों के लिए इसका सेवन करना भी जरूरी है।

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