हिंदी ENGLISH Monday, December 05, 2022
Follow us on
 
कविता
नन्ही सी परी

एक मीठी सी मुस्कान हैं बेटी,

यह सच है कि मेहमान हैं बेटी,

उस घर की पहचान बनने चली,

जिस घर से अनजान हैं बेटी।

बेटी हूं हिन्दुस्तान की

बेटी हूं हिन्दुस्तान की, सब पर मैं भारी हूं।

भारतवर्ष है जान मेरी, समाज की जिम्मेदारी हूं॥

युद्ध के दोहे

शत्रु पर न करें कभी, आप पूर्ण विश्वास। बदले की मिटती नहीं, कभी अधूरी प्यास।।