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देव परम्पराएं

लॉकडाउन : कुल्लू जिला में परंपरा टूटी, नहीं सज रहे मेले

निशितचंद्र चौधरी | May 05, 2020 09:46 AM

कोरोना महामारी के चलते कुल्लू जिला में अप्रैल से सिलसिलेवार शुरू होने वाले मेलों का आयोजन थम गया है। देश भर में भीड़ इक्कट्ठा होने पर रोक के सरकारी आदेश से जिला में देव समागम टाल दिए गए है।

गौरतलब है कि कुल्लू जिला में बसंत पंचमी से मेलों एवं पर्वों का शुभारंभ होता है। ढालपुर में 28 अप्रैल से तीन दिन तक मनाए जाने वाला राज्य स्तरीय पीपल मेला, तीन मई से शुरू होने वाला जिला स्तरीय सैंज मेला सरकार ने लॉक डाउन के चलते स्थगित किया है। इसके अलावा लारजी व देहूरी मेला भी नहीं होगा।

इन मेलों में देव परम्पराओं के निर्वाह की औपचारिकता मात्र निभाई जा रही है। देवसमाज और मेला कमेटी ने समय रहते मेले के आयोजन की अटकलों को विराम दे दिया है। मेला कमेटी और देव कारकूनों ने फोन पर हुई चर्चा व सोशल मीडिया के माध्यम से सभी की सहमति से फ़ैसला ले लिया।

कमेटी प्रधान नारायण चौहान में बताया कि बनोगी देहुरी में हर वर्ष दुर्गा माता और देवता पंडीर ऋषि के सम्मान में मई माह के पहले सप्ताह से शुरू किया जाता है। लेकिन वैश्विक महामारी के चलते मेला कमेटी व देव कारकूनों ने मेला आयोजित न करने का फ़ैसला लिया है। कमेटी अध्यक्ष नारायण चौहान, उपाध्यक्ष नारायण सिंह, रामदास, देवता पंडीर ऋषि के कारदार लोतम राम और देवी दुर्गा के कारदार किशन चंद सहित तमाम देव कारकूनों ने कहा कि वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए देव समाज सरकार के साथ है।

इसके अलावा सात मई को मनाए जाने वाले जिला स्तरीय आनी मेले, पंद्रह मई को बंजार मेले, ढूंगरी मेले सहित कई देव समागम इस बार नहीं होंगे। इन मेलों में हर वर्ष करोड़ों रुपए का व्यापार होता है और गुच्छी बाजार सजता है। जिला कारदार संघ के महासचिव नारायण सिंह ने कहा कि अधिकांश मेलों में तय नियमों के अनुसार देव मिलन की परंपरा निभाई जा रही है।

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