हिंदी ENGLISH Friday, November 27, 2020
Follow us on
 
विचार

असहज नहीं है होम क्वारंटीन का प्रोटोकाॅल

डाॅ. ऋचा वर्मा | June 07, 2020 12:22 PM
डाॅ. ऋचा वर्मा - उपायुक्त कुल्लू

दुनिया के लिए नासूर बन चुके कोरोना वायरस ने मानव जीवन के मानो मायने ही बदल डाले हों। सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, अध्यात्मिक और न जाने कितने क्षेत्रों में बदलावों को कोरोना ने जन्म दिया है। मनुष्य को उसकी जरूरतों और जीने के तौर-तरीकों के बारे में इतनी गहनता के साथ जानने और समझने का शायद ही कभी अवसर मिला हो। क्वारंटीन शब्द को व्यवहार में लाने का श्रेय दुष्ट कोरोना को जाना स्वाभाविक है।
कोरोना मानव शरीर की तलाश में रहता है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति जिस किसी भी व्यक्ति अथवा वस्तु के सम्पर्क में आता है, वहां पर वायरस की मौजूदगी हो जाती है। इसलिए मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का चलन भी व्यवहार में आया। हाॅट-स्पाॅट अथवा बाहरी प्रदेशों, देशों या फिर अनजान क्षेत्रों से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को क्वारंटीन करने का प्रोटोकाॅल विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तैयार किया गया है और यह पूरी दुनिया में लगभग एक सा ही है। देश, प्रदेश अथवा जिला की सीमा पर पहुंचने पर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाती है और वहीं से क्वारंटीन करने का निर्धारण किया जाता है। हाॅट-स्पाॅट तथा विदेशों से आने वाले तथा लक्षण वाले व्यक्ति को संस्थागत कवारंटीन जबकि ग्रीन जोन अथवा प्रदेश के अन्य जिलों के ग्रीन जोन से आने वालों को होम क्वारंटीन करने की हिदायत दी जा रही है।

कुल्लू की उपायुक्त डाॅ. ऋचा वर्मा का कहना है कि जिला के प्रवेश द्वार बजौरा में कोविड सुरक्षा कवच की स्थापना की गई है और बाहर से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की चिकित्सा स्क्रीनिंग करने के अलावा व्यक्ति की यात्रा का विवरण भी रिकार्ड किया जा रहा है। इसी केन्द्र से व्यक्ति के संस्थागत अथवा होम क्वारंटीन के निर्धारण का फैसला लिया जाता है। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत प्रधान अथवा नगर निकायों के प्रतिनिधियों से बात करके व्यक्ति को होम क्वारंटीन के लिए उनके सुपुर्द किया जा रहा है। होम क्वारंटीन के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित बनाना भी पहले से गठित समितियों का दायित्व है।

होम क्वारंटीन के दिशा-निर्देशों के बारे में उपायुक्त ने कहा कि होम क्वारंटीन को समझना व जानना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है ताकि वह स्वयं भी सुरक्षित रहंे परिवार और समाज को भी सुरक्षित रखने में योगदान करें। व्यक्ति को होम क्वारंटीन के लिए घर में हो अलग से कमरा व अलग से शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए जहां परिवार के अन्य सदस्यों की आवाजाही न हो। घर में बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं व बच्चों से दूरी बनाकर रखना अनिवार्य है। अपने कमरे के अलावा घर के अंदर कहीं पर भी आवाजाही नहीं होनी चाहिए।

इसके अलावा क्वारंटीन के दौरान व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में सामाजिक व धार्मिक समारोह में शामिल नहीं होना चाहिए। बार-बार साबुन से हाथ धोना अथवा  सैनेटाईजर का उपयोग करना चाहिए। घर की कोई भी वस्तु जैसे तौलिया, बिस्तर, बर्तन, गिलास इत्यादि परिवार के अन्य सदस्यों से सांझा नहीं किए जाने चाहिंए। हर वक्त मास्क अथवा फेस कवर का उपयोग किया जाना चाहिए। कफ, जुखाम या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र अथवा 104 पर सम्पर्क करने की हिदायत दी जाती है।

परिवार के सदस्यों के लिए सावधानियांे पर डाॅ. ऋचा वर्मा ने कहा कि क्वारंटीन व्यक्ति की देखभाल परिवार का केवल एक ही सदस्य करेगा। देखभाल कर रहा व्यक्ति क्वारंटीन व्यक्ति के सीधे सम्पर्क में विल्कुल न आए। सफाई करते समय डिस्पोजेबल दस्तानों का प्रयोग करें।घर में आगन्तुकों का प्रवेश वर्जित हो। क्वारंटीन पर व्यक्ति में कोरोना के लक्षण पाए जाते हैं तो उसके सम्पर्क में आए सभी व्यक्तियों को 14 दिनों के लिए होम क्वारंटीन किया जाएगा। इस अवधि को 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है अथवा जब तक रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आ जाती। क्वारंटीन व्यक्ति के कमरे के फर्श सहित सभी वस्तुओं को सोडियम हाईपोक्लोराईट के घोल से नित्य प्रति साफ किया जाना चाहिए। वाॅश रूम को नित्य प्रति फिनाईल इत्यादि से साफ करें तथा क्वारंटीन व्यक्ति के कपड़े, तौलिया इत्यादि को नियमित तौर पर धोएं।

उपायुक्त ने कहा कि क्वारंटीन का यह तात्पर्य नहीं कि व्यक्ति कोरोना संक्रमित है, बल्कि एहतियाती तौर पर बाहरी क्षेत्रों से आने वालों को क्वारंटीन किया जाना आवश्यक है। क्वारंटीन की अवधि 14 दिनों की है। चिकित्सा जांच के दौरान यदि किसी प्रकार के लक्षण व्यक्ति में नहीं आते हैं तो उसका क्वारंटीन सफल माना जाता है। उन्होंने कहा कि क्वारंटीन पर व्यक्ति से भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उसका स्वागत किया जाना चाहिए क्योंकि उसे अपने आप को, अपने परिवार को तथा समाज को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से क्वारंटीन किया जाना अनिवार्य है। क्वारंटीन असहज नहीं है बल्कि छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि एक अभियान के तहत लोगों को क्वारंटीन के बारे में जागरूक किया जा रहा है। क्वारंटीन के नियमों की इमानदारी के साथ पालना की जानी चाहिए ताकि व्यक्ति अपने आस-पड़ौस तथा समाज को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने में अपना योगदान दे सके।

डाॅ. ऋचा वर्मा - उपायुक्त कुल्लू 

Himachal News की खबरों के वीडियो देखने के लिए और Updates के लिए हमारे Facebook Page Himachal News7 और Himachal News TV को Like करें व हमारे YouTube चैनल Himachal News TV को Subscribe करें।

 

Have something to say? Post your comment