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रोचक है हिमाचल के इतिहास का सफर

हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क | January 24, 2023 03:21 PM

हिमाचल प्रदेश का इतिहास उतना ही प्राचीन है, जितना कि मानव अस्तित्व का अपना इतिहास है। इस बात की सत्यता के प्रमाण हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों में हुई खुदाई में प्राप्त सामग्रियों से मिलते हैं। प्राचीनकाल में इस प्रदेश के आदि निवासी दास, दस्यु और निषाद के नाम से जाने जाते थे। हिमाचल प्रदेश का शाब्दिक अर्थ "बर्फ़ीले पहाड़ों का प्रांत" है। हिमाचल प्रदेश को "देव भूमि" भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में आर्यों का प्रभाव ऋग्वेद से भी पुराना है। देवभूमि और ऋषि मुनियों की तपोभूमि हिमाचल। माण्डूक्य ऋषि ने यहां उपनिषद् की रचना की और महर्षि व्यास ने महाभारत जैसे विशाल काव्य की सृजन किया।

इतिहास बताता है कि इस प्रदेश में हर्षवर्धन ने सातवीं शताब्दी में तथा आठवीं शताब्दी में मुक्तादित्य का राज्य-शासन रहा है। पन्द्रहवीं शती में राजा केहर सिंह ने यहां राज किया। आंग्ल-गोरखा युद्ध के बाद, यह ब्रिटिश पहाड़ी क्षेत्र औपनिवेशिक सरकार के हाथ में आ गया। अठारहवीं शती में गोरखों ने यहाँ के बुशैहर पर आक्रमण किया। जब अंग्रेज यहां आए, तो उन्होंने गोरखा लोगों को पराजित करके कुछ राजाओं की रियासतों को अपने साम्राज्य में मिला लिया। उन्नीसवीं शताब्दी में रणजीत सिंह ने इस क्षेत्र के अनेक भागों को अपने राज्य में मिला लिया। सन 1857 तक यह महाराजा रणजीत सिंह के शासन के अधीन पंजाब राज्य (पंजाब हिल्स के सीबा राज्य को छोड़कर) का हिस्सा था। उसके पश्चात् यह प्रदेश अंग्रेजी सरकार के अधीन हो गया और इस प्रदेश के शासन को राजा महेन्द्र सिंह, उसके पुत्र शमशेर सिंह और पौत्र रघुनाथ सिंह ने चलाया। ब्रिटिश कालीन समय में ग्रीष्‍म कालीन राजधानी शिमला थी।

  

शिमला हिल स्टेट्स की स्थापना
1945 ई. तक प्रदेश भर में प्रजा मंडलों का गठन हो चुका था। 1946 ई. में सभी प्रजा मंडलों को एचएचएसआरसी में शामिल कर लिया तथा मुख्यालय मंडी में स्थापित किया गया। मंडी के स्वामी पूर्णानंद को अध्यक्ष, पदमदेव को सचिव तथा शिव नंद रमौल (सिरमौर) को संयुक्त सचिव नियुक्त किया। एचएचएसआरसी के नाहन में 1946 ई. में चुनाव हुए, जिसमें यशवंत सिंह परमार को अध्यक्ष चुना गया। जनवरी, 1947 ई. में राजा दुर्गा चंद (बघाट) की अध्यक्षता में शिमला हिल्स स्टेट्स यूनियन की स्थापना की गई। 

 हिमाचल प्रदेश की स्थापना
स्वतंत्रता का युग आने के बाद हिमाचल ने भी करवट बदली। जनवरी, 1948 ई. में इसका सम्मेलन सोलन में हुआ। हिमाचल प्रदेश के निर्माण की घोषणा इस सम्मेलन में की गई। दूसरी तरफ प्रजा मंडल के नेताओं का शिमला में सम्मेलन हुआ, जिसमें यशवंत सिंह परमार ने इस बात पर जोर दिया कि हिमाचल प्रदेश का निर्माण तभी संभव है, जब शक्ति प्रदेश की जनता तथा राज्य के हाथ सौंप दी जाए। शिवानंद रमौल की अध्यक्षता में हिमालयन प्लांट गर्वनमेंट की स्थापना की गई, जिसका मुख्यालय शिमला में था। दो मार्च, 1948 ई. को शिमला हिल स्टेट के राजाओं का सम्मेलन दिल्ली में हुआ। राजाओं की अगुवाई मंडी के राजा जोगेंद्र सेन कर रहे थे। इन राजाओं ने हिमाचल प्रदेश में शामिल होने के लिए 8 मार्च 1948 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। 15 अप्रैल 1948 ई. को हिमाचल प्रदेश राज्य का निर्माण किया गया। 15 अप्रैल 1948 की हिमाचल प्रदेश चीफ़ कमिश्नर के राज्यों के रूप में अस्तित्व में आया। उस समय प्रदेश भर को चार जिलों में बांटा गया और पंजाब हिल स्टेट्स को पटियाला और पूर्व पंजाब राज्य का नाम दिया गया। 1948 ई. में सोलन की नालागढ़ रियासत को शामिल किया गया। अप्रैल 1948 में इस क्षेत्र की 27,000 वर्ग कि॰मी॰ में फैली लगभग 30 रियासतों को मिलाकर इस राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। हर साल 15 अप्रैल “हिमाचल दिवस” के रूप में मनाया जाता है।

1950 ई. में प्रदेश का पुनर्गठन
भारतीय संविधान लागू होने के साथ 26 जनवरी 1950 को हिमाचल प्रदेश 'ग' श्रेणी का राज्य बन गया। 1950 ई. में प्रदेश के पुनर्गठन के अंतर्गत प्रदेश की सीमाओं का पुनर्गठन किया गया। कोटखाई को उपतहसील का दर्जा देकर खनेटी, दरकोटी, कुमारसैन उपतहसील के कुछ क्षेत्र तथा बलसन के कुछ क्षेत्र तथा बलसन के कुछ क्षेत्र कोटखाई में शामिल किए गए। कोटगढ़ को कुमारसैन उपतहसील में मिला गया। उत्तर प्रदेश के दो गांव संगोस और भांदर जुब्बल तहसील में शामिल कर दिए गए। पंजाब के नालागढ़ से सात गांव लेकर सोलन तहसील में शामिल गए गए। इसके बदले में शिमला के नजदीक कुसुम्पटी, भराड़ी, संजौली, वाक्ना, भारी, काटो, रामपुर। इसके साथ ही पेप्सी (पंजाब) के छबरोट क्षेत्र कुसुम्पटी तहसील में शामिल कर दिया गया।

  

बिलासपुर जिला का विलय
बिलासपुर रियासत को 1948 ई. में प्रदेश से अलग रखा गया था। उन दिनों इस क्षेत्र में भाखड़ा-बांध परियोजना का कार्य चलाने के कारण इसे प्रदेश में अलग रखा गया। एक जुलाई, 1954 ई. को कहलूर रियासत को प्रदेश में शामिल करके इसे बिलासपुर का नाम दिया गया। उस समय बिलासपुर तथा घुमारवीं नामक दो तहसीलें बनाई गईं। यह प्रदेश का पांचवां जिला बना।

केंद्रशासित प्रदेश
1954 में जब ‘ग’ श्रेणी की रियासत बिलासपुर को इसमें मिलाया गया, तो इसका क्षेत्रफल बढ़कर 28,241 वर्ग कि.मी.हो गया और हिमाचल प्रदेश, 1 जुलाई 1956 में केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया। 1 नवंबर 1966 को कांगड़ा और पंजाब के अन्य पहाड़ी इलाकों को हिमाचल में मिला दिया गया लेकिन इसका स्वरूप केंद्रशासित प्रदेश का ही रहा।

किन्नौर जिला की स्थापना
एक मई, 1960 को छठे जिला के रूप में किन्नौर का निर्माण किया गया। इस जिला में महासू जिला की चीनी तहसील तथा रामपुर तहसील को 14 गांव शामिल किए गए। इसकी तीन तहसीलें कल्पा, निचार और पूह बनाई गईं।

पंजाब का पुनर्गठन
वर्ष 1966 में पंजाब का पुनर्गठन किया गया तथा पंजाब व हरियाणा दो राज्य बना दिए गए। भाषा तथा पहाड़ी क्षेत्र के पंजाब को हिमाचल प्रदेश में शामिल किया गया। संजौली, भराड़ी, कुसुमपटी आदि क्षेत्र जो पहले पंजाब में थे तथा नालागढ़ आदि जो पंजाब में थे, उन्हें हिमाचल प्रदेश में शामिल कर दिया गया। सन 1966 में इसमें पंजाब के पहाड़ी क्षेत्रों को मिलाकर इसका पुनर्गठन किया गया तो इसका क्षेत्रफल बढ़कर 55,673 वर्ग कि॰मी॰ हो गया। 

पूर्ण राज्य के लिए संघर्ष
प्रदेश का गठन 15 अप्रैल, 1948 को इस पहाडी प्रदेश को 31 छोटी बड़ी रियासतों को मिलाकर किया गया था। तब यह ‘ग’ श्रेणी का राज्य बना था लेकिन बाद में इसका दर्जा घटा कर इसे केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया गया। राज्य के राजनीतिक नेताओं ने तत्कालीन मुख्यमन्त्री डा. यशवंत सिंह परमार के नेतृत्व में हिमाचल को पूर्ण राज्यत्व दिलाने के लिए वर्षों तक शांतिपूर्ण संघर्ष किया । हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त करने के लिए एक लंबा लेकिन अहिंसक संघर्ष चला, जबकि देश के अन्य हिस्सों में ऐसी किसी भी मांग तथ उसकी पूर्ति के साथ व्यापक हिंसा जुड़ी रहती है। यह निःसंदेह एक स्वर्णिम संघर्ष था। 

पहली नवंबर 1966 ई. को कांगड़ा, कुल्लू, लाहौल-स्पिति, शिमला, नालागढ़, कंडाघाट, ऊना डलहौजी आदि क्षेत्र हिमाचल प्रदेश में मिला दिए और इन क्षेत्रों के विधान सभा सदस्य हिमाचल विधान सभा के सदस्य बने। इस प्रकार चिनाव रावी नदी से लेकर यमुना नदी तक का समस्त पहाड़ी क्षेत्र एक होकर विशाल हिमाचल बना। इस पहाड़ी लोगों का स्वप्न साकार हुआ। अब हिमाचल प्रदेश का क्षेत्रफल बढ़कर 55,675 वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या 28,12, 463.

31 जुलाई, 1970 ई. को प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने लोकसभा में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की घोषणा की और तत्पश्चात दिसंबर 1970 से संसद में ‘स्टेट ऑफ हिमाचल प्रदेश एक्ट 1971’ पेश करके पास किया। 

  

पूर्ण राज्य के रूप में हिमाचल
25 जनवरी, 1971 ई. को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शिमला आकर रिज मैदान से भारी हिमपात के बीच हजारों हिमाचलवासियों के सामने हिमाचल प्रदेश का 18वें पूर्ण राज्य के रूप में उद्घाटन किया और यह भारतीय गणतन्त्र का अठारहवां राज्य बना। पूर्ण राज्य का दर्जा मिला हिमाचल प्रदेश पहाड़ी लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है। यह दिन हिमाचल प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों, प्रजामंडलों के कार्यकर्ताओं और राज्यत्व की प्राप्ति के लिए संघर्ष करने वाले नर-नारियों तथा डा. यशवंत सिंह परमार के लिए अत्यंत खुशी का दिन था, क्योंकि इसी दिन से यहां के भोले-भाले, निश्छल किंतु जुझारू और स्वतंत्रता प्रेमी तथा देशद्रोही ताकतों को कुचलने वाले हिमाचलवासियों का स्वप्न साकार हुआ था और उन्होंने अपना भविष्य अपने द्वारा चुनी हुई सरकार को सौंपा था। 1 नवम्बर 1972 को कांगड़ा ज़िले के तीन ज़िले कांगड़ा, ऊना तथा हमीरपुर बनाए गए। महासू ज़िला के क्षेत्रों में से सोलन ज़िला बनाया गया।

ऐसे हुआ हिमाचल प्रदेश का नामकरण
'हिमाचल प्रदेश' नाम संस्कृत के विद्वान आचार्य दिवाकर दत्त शर्मा ने दिया था। हिमाचल दो शब्दों से मिलकर बना है- हिम+अचल। हिम यानी बर्फ और अचल यानी पहाड़। 

  

हिमाचल का भूगोल
हिमाचल प्रदेश उत्तर-पश्चिमी भारत में स्थित एक राज्य है। यह 21,629 मील (56019 किमी) से अधिक क्षेत्र में फ़ैला है तथा उत्तर में जम्मू कश्मीर, पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम में पंजाब (भारत), दक्षिण में हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखण्ड तथा पूर्व में तिब्बत से घिरा हुआ है। यह भारत के छोटे राज्यों में से एक पहाड़ी राज्य है। जिसकी राजधानी शिमला है। 

 हिमाचल प्रदेश की जनसंख्या
भारत की 2011 जनगणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश की कुल जनसंख्या 68,64,602 है। इनमें पुरुषों की जनसंख्या 34,81,873 तथा महिलाओं की जनसंख्या 33,82,729 है। 2011 की जनगणना आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश का लिंग अनुपात 972/1000 और साक्षरता दर 82.8% है।

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हिमाचल न्यूज़

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